UPI और RuPay लेनदेन पर फिर से लागू हो सकता है मर्चेंट चार्ज

Mohini Bhade Avatar
UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)

सरकार UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस लाने पर कर रही विचार

सरकार बड़े व्यापारियों के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और RuPay डेबिट कार्ड, से होने वाले लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फिर से लागू करने पर विचार कर रही है। The Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकिंग उद्योग ने सरकार से इस संबंध में औपचारिक अनुरोध किया है, और संबंधित विभाग इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं।

बड़े व्यापारियों के लिए MDR की वापसी


MDR वह शुल्क है जो व्यापारी बैंकों को रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन संसाधित करने के लिए देते हैं। वर्तमान में, सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतानों पर MDR को समाप्त कर दिया था। लेकिन अब, सरकार उन व्यापारियों पर MDR लगाने पर विचार कर रही है, जिनका वार्षिक टर्नओवर ₹40 लाख से अधिक है (GST फाइलिंग के आधार पर)।

छोटे व्यापारियों को मिल सकती है छूट


सरकार एक टियर-आधारित मूल्य निर्धारण मॉडल लागू कर सकती है, जिसमें बड़े व्यापारियों को अधिक शुल्क देना होगा, जबकि छोटे व्यापारियों को कम या कोई शुल्क नहीं लगेगा। रिपोर्ट के अनुसार, जिन व्यापारियों का वार्षिक कारोबार ₹40 लाख से कम है, उनके लिए UPI भुगतान मुफ्त रहेगा।

अन्य भुगतान माध्यमों पर पहले से लागू है MDR


एक बैंकिंग अधिकारी के अनुसार, बड़े व्यापारी पहले से ही Visa, Mastercard डेबिट कार्ड और सभी क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर एम डी आर का भुगतान करते हैं, इसलिए उन्हें UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर भी यही शुल्क देना चाहिए।


वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए MDR को समाप्त कर दिया था, लेकिन अब UPI देश में प्रमुख खुदरा भुगतान माध्यम बन गया है और RuPay की भी स्वीकार्यता बढ़ रही है, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि MDR की पूर्ण छूट अब आवश्यक नहीं है।

बड़े व्यापारियों के लिए UPI पर चार्ज जरूरी?


बैंकिंग उद्योग का कहना है कि बड़े खुदरा व्यापारी अपने कुल लेनदेन का 50% से अधिक कार्ड भुगतान के माध्यम से प्राप्त करते हैं, इसलिए UPI पर MDR लगाना उनके लिए बहुत अधिक आर्थिक बोझ नहीं होगा।

फरवरी 2025 में, पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन विश्वास पटेल ने चिंता जताई थी कि सरकार बड़े व्यापारियों को सब्सिडी देकर फायदा पहुंचा रही है, जबकि उन्हें भुगतान प्रोसेसिंग के लिए एक मामूली शुल्क देना चाहिए, जिससे सरकार पर करदाताओं के पैसे का अतिरिक्त बोझ न पड़े।

डिजिटल भुगतान सब्सिडी में भारी कटौती


वित्त वर्ष 2025 के बजट में भुगतान सब्सिडी का आवंटन ₹3,500 करोड़ से घटाकर मात्र ₹437 करोड़ कर दिया गया। इसके अलावा, बैंक अभी भी पिछले वर्ष की सब्सिडी राशि प्राप्त करने का इंतजार कर रहे हैं।
हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा के साथ बैठक में फिनटेक कंपनियों ने भी इस मुद्दे को उठाया।

UPI का बढ़ता दबदबा


राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2025 में UPI के माध्यम से 16.11 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹22 ट्रिलियन था। जनवरी में यह आंकड़ा 16.99 अरब लेनदेन था। अब देखना होगा कि सरकार इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेती है और क्या बड़े व्यापारियों को डिजिटल भुगतान के लिए शुल्क देना पड़ेगा।

Mohini Bhade Avatar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Author Profile

द दिव्य भारत का एकमात्र उद्देश्य सकारात्मकता के साथ-साथ विश्वसनीय और जन सरोकारों वाली पत्रकारिता करना है। इसके लिए हम प्रतिबद्ध हैं। हमारा ध्येय वाक्य – एक कदम दिव्यता की ओर। द दिव्य भारत हमेशा आम जनता / नागरिकों के पक्ष में खड़ा रहने का वचन देता है।

Search