नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने OTT प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लील सामग्री को एक गंभीर मुद्दा करार दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह इस दिशा में ठोस दिशा-निर्देश तैयार करे ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक शिष्टाचार और नैतिक मूल्यों की रक्षा हो सके।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर परोसी जा रही अनुचित सामग्री युवाओं और समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस विषय में किसी भी प्रकार की कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को अवैध रूप से सीमित नहीं करे, बल्कि संतुलन स्थापित किया जाए।
केंद्र सरकार ने दी जानकारी
सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया कंपनियों के लिए पहले से ही आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 लागू कर रखे हैं। इन नियमों के तहत आयु-आधारित कंटेंट क्लासिफिकेशन, सामग्री की निगरानी और आपत्तिजनक पोस्टिंग पर रोक संबंधी प्रावधान शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, सरकार अब और अधिक कठोर नियंत्रण उपायों पर भी विचार कर रही है। इस प्रक्रिया में सभी हितधारकों से सुझाव मांगे जाएंगे ताकि नए नियम संतुलित और पारदर्शी हों।
अब तक उठाए गए कदम
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में सरकार ने 18 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार के चलते ब्लॉक भी किया है। इसके साथ ही डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के मानदंडों के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
भविष्य की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि सरकार कोई भी नया कानून बनाने से पहले उसे सार्वजनिक विमर्श के लिए प्रस्तुत करे। इससे विभिन्न पक्षों की राय को शामिल करते हुए एक व्यापक और लोकतांत्रिक समाधान निकाला जा सकेगा।
इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का जायजा लेगी।











Leave a Reply