अंतरिक्ष में रहने का रकॉर्ड तोड़ने के बाद Sunita Williams 17 घंटे की यात्रा कर सुनीता धरती पर लौटी अपने सहयोगी बुच विल्मोर के साथ बुधवार सुबह पृथ्वी पर सुरक्षित लौट आई हैं। यह विज्ञान तथा अंतरिक्ष यात्रा के मामले में बहुत ही राहतभरी सूचना है क्योंकि पिछले साल जून में महज़ आठ दिनों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर गए थे। उन्हें पृथ्वी पर लाने के अनेक प्रयास विफल रहे इसलिए उन्हें 9 महीने 14 दिन अंतरिक्ष में रहना पड़ा। आख़िरकार एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल उन्हें लेकर आया।
इनके साथ क्रू-9 के दो और एस्ट्रोनॉट अमेरिका के निक हेग और रूस के अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी हैं। ये उन्हें लेने गए थे। उनका ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट भारतीय समयानुसार 19 मार्च को सुबह 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर समुद्र में उतरा। अंतरिक्षयान के धरती के वायुमंडल में प्रवेश के समय पर इसका तापमान 1650 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो गया था। इस दौरान करीब 7 मिनट के लिए कम्युनिकेशन ब्लैकआउट रहा, यानी यान से पृथ्वी का संपर्क नहीं रहा।
अंतरिक्ष स्टेशन से ड्रैगन कैप्सूल के अलग होने से लेकर समुद्र में उतरने तक करीब 17 घंटे लगे। 18 मार्च को सुबह 08:35 बजे स्पेसक्राफ्ट का हैच हुआ, यानी दरवाजा बंद हुआ। 10:35 बजे स्पेसक्राफ्ट इंटरनेशनल स्पेस स्पेस से अलग हुआ।
समंदर के सतह पर आने के बाद कंट्रोल सेंटर की ओर से अंतरिक्ष यात्रियों का स्वागत करते हुए कहा गया, “निक, एलेक, बुच, सुनी…स्पेसएक्स की ओर से घर वापस आने का स्वागत है.” कमांडर निक हेग ने ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए जवाब दिया, “कैप्सूल में सभी के चेहरे पर मुस्कुराहटों से भरा है.”
समोसे पसंद हैं रिकॉर्ड तोड़ा
अप्रैल 2012 में दिल्ली के नेशनल साइंस सेंटर में छात्रों को संबोधित करते हुए सुनीता विलियम्स ने कहा था ‘रिकॉर्ड बनते ही हैं टूटने के लिए और उन्हें उम्मीद है कि उनका भी रिकॉर्ड ज़रूर टूटेगा.’
सुनीता विलियम्स अपनी तीसरी अंतरिक्ष यात्रा के साथ सबसे ज्यादा समय तक स्पेसवॉक करने वाली महिला बन गई हैं. पहले यह रिकॉर्ड पिग्गी वीटर्स के नाम था। सुनीता विलियम्स ने तीन अंतरिक्ष यात्राओं के दौरान नौ बार में कुल 62 घंटे और 6 मिनट स्पेसवॉक किया है. वहीं पिग्गी ने 60 घंटे 21 मिनट स्पेसवॉक किया था। इसके अलावा अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली दुनिया की पहली अंतरिक्ष यात्री भी हैं. उन्होंने अप्रैल 2007 में बोस्टन मैराथन में अंतरिक्ष से ही शिरकत की थी।
गांव में जश्न
सुनीता विलियम्स मूल रूप से गुजरात के मेहसाणा स्थित झूलासन गांव की हैं। वहां लोग जश्न में डूबे हैं। सुनीता की सही सलामत धरती पर वापसी के लिए यहां पिछले 9 महीने से अखंड ज्योत जलाई गई थी। अब सुनीता वापस आई हैं तो गांव वाले खुशी से फूले नहीं समा रहे। झूलासन गांव में ही सुनीता के पिता दीपक पांड्या का जन्म हुआ था। वो फिर यहां से साल 1957 में अमेरिका चले गए थे। इस लिहाज से यह झूलासन सुनीता का पैतृक गांव है। सुनीता के कई रिश्तेदार और परिवार के लोग अभी भी झूलासन में ही रहते हैं। 2006 और 2013 में सुनीता यहां आ चुकी हैं। इस गांव के लोग सुनीता की धरती पर सुरक्षित वापसी के लिए के लिए 9 महीने तक ‘अखंड ज्योति’ जलाकर प्रार्थना करते रहे। सुनीता की वापसी के के बाद गांव में जमकर आतिशबाजी की गई तो लोगों ने एक दूसरे को गुलाल भी लगाए। ढोल बजाकर लोग खूब नाचे.











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