मुंबई। नागपुर में मुगल बादशाह औरंगज़ेब की कब्र को हटाए जाने की मांग पर उपद्रव चल रहे हैं। इसे देखते हुए मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने उपद्रवियों पर तंज कसा है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि लोगों को औरंगजेब की अब याद आ रही है जब फिल्म छावा पर्दे पर आई है। लेकिन छावा नामक उपन्यास तो 60 साल पहले शिवाजी सावंत ने लिखा था। तब किसी ने कोई आंदोलन नहीं किया था।
इस बीच, नागपुर हिंसा मामले में पांच एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। करीब 47 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 10 थाना इलाकों में एहतियातन कर्फ्यू लगाया गया है। इस घटना में डीसीपी निकेतन कदम पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया गया। डीसीपी समेत 33 पुलिसकर्मी घायल हुए। वहीं, कुछ आम लोगों के भी इस हिंसा में घायल होने की सूचना है।
उल्लेखनीय है कि नागपुर न केवल मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी का क्षेत्र है बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय भी यहीं पर है।
98 साल बाद ऐसी हिंसा
सोमवार को नागपुर में भड़की हिंदा 98 साल में पहली है। इसमें डीएसपी स्तर के 3 अधिकारी घायल हुए हैं। मंगलवार को राज्य विधानसभा में यह मामला विपक्ष ने उठाया। सदन के बबाहर भी विधायकों ने प्रदर्शन किया। विपक्ष ने मंत्री नीतेश राणे को बर्खास्त करने की मांग की। राणे ने सपा विधायक अबू आजमी पर हिसा भड़काने का आरोप लगाया था। इससे पहले 4 सितंबर 1927 को इसी महल इलाके में इसी पैटर्न पर दंगा भड़का था जिसकी रिपोर्टिंग न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट जैसे अखबारों ने बी की थी। उन दंगों में 25 लोग मारे गए थे और 180 से अधिक घायल हुए थे।
धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप
आंदोलन के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी, जिसमें उन पर एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। गणेशपेठ थाने के एक अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें कुछ हिंदू सगठनों के पदाधिकारियों के नाम भी दर्ज हैं।











Leave a Reply