सोल। दक्षिण कोरिया की संवैधानिक अदालत ने महाभियोग का सामना कर रहे राष्ट्रपति यून सुक योल को पद से हटाने का आदेश दिया है। उन पर देश में मार्शल लॉ लागू करने और संसद में सेना भेजने का आरोप है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मून ह्युंग-बे ने मार्शल लॉ घोषित करने के यून के प्रत्येक कारण को खारिज कर दिया और कहा कि राष्ट्रपति ने दिसंबर में राजधानी की सड़कों पर सैनिकों को तैनात करके अपने अधिकार का अतिक्रमण किया है। अब दो महीने में दक्षिण कोरिया में चुनाव करवाने होंगे।
विपक्ष नियंत्रित नेशनल असेंबली ने राष्ट्रपति यून सुक योल के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई की थी। उसके तीन महीने बाद शुक्रवार को संवैधानिक अदालत ने सर्वसम्मति से राष्ट्रपति को पद से हटाने का फैसला दिया है। अब दक्षिण कोरिया को दो महीने के भीतर 3 जून तक नए राष्ट्रपति को चुनना होगा और राष्ट्रीय चुनाव कराने होंगे।
विभिन्न सर्वेक्षणों से पता चला है कि विपक्षी पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ली जे म्यांग, देश का अगला राष्ट्रपति बनने की रेस में सबसे आगे हैं। जब संवैधानिक अदालत ने यून सुक योल को राष्ट्रपति पद से हटाने का फैसला सुनाया तब राजधानी सोल में यून सुक योल के खिलाफ एक रैली आयोजित हो रही थी। जैसे ही अदालत ने योल को पद से हटाने का फैसला सुनाया तो रैली में लोग खुशी से झूम उठे और नाचने लगे।
बढ़ सकता है योल का समर्थन
बड़ी संख्या में लोग योल का समर्थन भी कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में योल के समर्थन में रैलियां भी बढ़ सकती हैं। इससे देश में विभाजन बढ़ सकता है। राष्ट्रपति योल ने बीते साल 3 दिसंबर को देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया था और सैंकड़ों सैनिकों और पुलिस अधिकारियों को नेशनल असेंबली भेज दिया था। हालांकि वे केवल 6 घंटे सदन में रहे। उन्होंने तर्क दिया कि उन्होंने सिर्फ सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसा किया था, लेकिन जांच के दौरान सैन्य अधिकारियों ने बताया कि यून ने उन्हें विपक्षी सांसदों को सदन से बाहर निकालने का आदेश दिया था ताकि वे उनके आदेश के खिलाफ मतदान न कर सकें। हालांकि विपक्षी सांसद किसी तरह सफल रहे और उन्होंने योल के आदेश के खिलाफ मतदान कर उसे रद्द करा दिया।











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