बैंकों के छिपे शुल्कों पर राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की चिंता

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नई दिल्ली | आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में बैंकों द्वारा ग्राहकों से वसूले जाने वाले छिपे हुए शुल्कों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इन शुल्कों को “कानूनी जेबकतरी” करार देते हुए सरकार से इनके नियंत्रण की मांग की।

बैंकों के विभिन्न शुल्कों पर सवाल
सांसद राघव चड्ढा ने बताया कि बैंक विभिन्न सेवाओं के लिए ग्राहकों से शुल्क वसूलते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

न्यूनतम बैलेंस न रखने पर पेनल्टी: यदि खाता धारक निर्धारित न्यूनतम बैलेंस नहीं रखता है, तो बैंक ₹100 से ₹600 तक का शुल्क वसूलते हैं। वित्त वर्ष 2022-23 में, बैंकों ने इस शुल्क से लगभग ₹3,500 करोड़ की कमाई की।

एटीएम उपयोग शुल्क: निर्धारित मुफ्त लेनदेन सीमा पार करने के बाद प्रत्येक अतिरिक्त एटीएम लेनदेन पर ₹20 का शुल्क लगता है।

निष्क्रियता शुल्क: लंबे समय तक खाता सक्रिय न रहने पर ₹100 से ₹200 तक का वार्षिक शुल्क वसूला जाता है।

बैंक स्टेटमेंट शुल्क: बैंक स्टेटमेंट जारी करने के लिए ₹50 से ₹100 तक का शुल्क लिया जाता है।

एसएमएस अलर्ट शुल्क: ग्राहकों को लेनदेन की सूचनाएं भेजने के लिए ₹20 से ₹25 प्रति तिमाही शुल्क वसूला जाता है।

ऑनलाइन एनईएफटी लेनदेन शुल्क: ऑनलाइन फंड ट्रांसफर के लिए भी बैंक शुल्क लगाते हैं।

ऋण प्रसंस्करण और पूर्व भुगतान शुल्क: ऋण लेते समय 1% से 3% तक का प्रसंस्करण शुल्क वसूला जाता है, और समय से पहले ऋण चुकाने पर पूर्व भुगतान पेनल्टी लगती है।

हस्ताक्षर या नामिनी विवरण बदलने पर शुल्क: बैंक इस प्रक्रिया के लिए ₹200 तक का शुल्क लेते हैं।

डिमांड ड्राफ्ट या पे ऑर्डर शुल्क: प्रत्येक डिमांड ड्राफ्ट पर ₹100 से ₹200 तक का शुल्क लिया जाता है।

ग्राहकों की मेहनत की कमाई पर असर
राघव चड्ढा ने कहा कि ये शुल्क ग्राहकों के लिए एक बड़ी समस्या बन गए हैं और उनकी मेहनत की कमाई बिना किसी स्पष्ट सूचना के काटी जा रही है। उन्होंने इस मामले को उपभोक्ता हितों के खिलाफ बताया और सरकार से अनुरोध किया कि इन शुल्कों को नियंत्रित किया जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

सरकार से कार्रवाई की मांग
उन्होंने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने और बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता लाने की अपील की। उनका कहना है कि बैंकों द्वारा इस तरह के शुल्क वसूलना जनता के साथ अन्याय है और सरकार को इस पर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।

राघव चड्ढा के इस भाषण के बाद बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाती है।

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