जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने लोक सेवक पर हमला करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के 20 साल पुराने मामले में अंता के भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा को मिली तीन साल की सजा को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उनकी रिवीजन याचिका को खारिज करते हुए उन्हें तुरंत निचली अदालत में सरेंडर करने को कहा है। अदालत ने कहा कि यदि अभियुक्त सरेंडर नहीं करता, तो निचली अदालत गिरफ्तारी वारंट जारी करे. जस्टिस उमाशंकर व्यास की एकलपीठ ने यह आदेश शुक्रवार को दिया। हाईकोर्ट के इस निर्णय ने राजस्थान की सियासत में हलचल बढ़ गई है।
इस फैसले के बाद अब मीणा की विधायक सदस्यता पर तलवार लटक रही है और उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। यह मामला 2005 का है जब मीणा पर उपखंड अधिकारी को रिवॉल्वर दिखाकर धमका कर पुनर्मतदान की मांग करने का आरोप लगा था। सदस्यता पर तलवार तब तक लटकी रहेगी जब तक यह खतरा तब तक बना रहेगा, जब तक कि हाई कोर्टया सुप्रीम कोर्ट उनकी सजा पर रोक नहीं लगाता या उसे रद्द नहीं करता।
क्या था पूरा मामला?
मनोहरथाना में दर्ज प्रकरण के अनुसार बीस साल पहले फरवरी 2005 में खताखेड़ी उप सरपंच का चुनाव कराने को लेकर लोगों ने जाम लगा रखा था। मौके पर उपखंड अधिकारी रामनिवास मेहता और आइएएस प्रोबेशनर प्रीतम बी यशवन्त पंहुचे। तभी वहां कंवरलाल मीणा और अन्य लोग आए। कंवरलाल ने रिवाल्वर निकालकर उपखण्ड अधिकारी की कनपटी पर तान दी और जान से मारने की धमकी देते हुए पुनर्मतदान कराने को कहा।
इस मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोहरथाना ने 2 अप्रेल 2018 को कंवरलाल मीणा और अन्य लोगों को बरी कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ निगरानी याचिका पर सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अकलेरा ने अधीनस्थ अदालत के निर्णय को 14 दिसम्बर 2020 को अपास्त कर दिया।
सत्र न्यायालय ने कंवरलाल मीणा को दोषी मानते हुए 3 पीडीपीपी एक्ट के तहत 3 साल के कठोर कारावास और दस हजार रुपए जुर्माना, धारा 506 के तहत 3 वर्ष के कठोर कारावास और दस हजार रुपए जुर्माना तथा धारा 353 के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास व पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा से दंडित किया। उच्च न्यायालय ने इस निर्णय के खिलाफ कंवरलाल मीणा की निगरानी याचिका खारिज कर सजा बरकरार रखा।
क्या कहते हैं नियम ?
सुप्रीम कोर्ट के लिलि थॉमस बनाम भारत सरकार (2013) फैसले के अनुसार, यदि कोई सांसद, विधायक या विधान परिषद सदस्य किसी आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाता है और उसे कम से कम दो साल की सजा मिलती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाती है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 2 साल की सजा मिलने के बाद उनकी संसद सदस्यता चली गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा उस सजा पर रोक लगाए जाने के बाद उनकी सदस्यता बहाल हो गई थी।











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