भोपाल। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष पाहुल गांधी ने अपनी पार्टी को फिर से उठाने का जिम्मा लिया है। मंगलवार को उन्होंने मध्यप्रदेश का दौरा किया। वे प्रदेश में ‘संगठन सृजन अभियान’ की शुरुआत करने भोपाल आए थे। करीब 6 घंटे में उन्होंने 3 अहम बैठकें लीं और ब्लॉक व जिला अध्यक्षों से लेकर विधायकों व सांसदों तक से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि घोड़े तीन तरह के होते हैं। बारात के, रेस के और तीसरे लंगड़े। उन्होंने कहा कि बारात के घोड़ों को बारात में डालो, रेस के घोड़ों को रेस में डालो और लंगड़े और थके हुए घोड़े खुद ही पीछे हट जाएं, वे बेवजह टांग न अड़ाएं। यह उन्होंने बड़े-बूढ़े कांग्रेसी नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि अब हमें हर हाल में जीत चाहिए। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की अंतिम सरकार 17 दिसंबर 2018 से 23 मार्च 2020 तक कुल 1 साल 128 दिन रही। कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया अचानक कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में चले गए और भाजपा की सरकार बनवा दी थी। उससे पहले दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक 10 साल राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे।
अब से करीब 2 साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार मिली थी। इसके बाद लोकसभा चुनाव में भी पार्टी अपना एकमात्र गढ़ छिंदवाड़ा को गंवा बैठी थी। पार्टी की ऐसी दुर्गति इससे पहले कभी नहीं हुई थी। जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, हेमंत कटारे आदि नेता बीजेपी को घेरने का हर जतन तो कर रहे हैं पर अभी बात बनते दिख नहीं रही है। ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा कांग्रेसियों को उत्साहित करने में कामयाब करता दिखता है। कार्यकर्ताओं का जोश सुबह एयरपोर्ट से लेकर शाम को रवींद्र भवन तक में नजर आया। ब्लॉक अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों की जिम्मेदारी नई पीढ़ी को देने की राहुल गांधी की घोषणा के बाद आम कार्यकर्ताओं का उत्साह और बढ़ गया। रवींद्र भवन से बाहर निकलते कार्यकर्ता नई आशा और विश्वास से लबरेज नजर आए।
राहुल गाधी ने अपने चिर परिचित अंदाज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि ट्रम्प का एक फोन आया नरेंदर हो जा सरेंडर और नरेंदर सरेंडर हो गया। आरएसएस के कटु आलोचक राहुल गांधी अब उसी की तर्ज पर संगठन की महत्ता प्रतिपादित कर रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा-नेताओं के चक्कर लगाना छोड़ दो। पार्टी अब जमीनी स्तर पर काम करेगी। लोकसभा व विधानसभा की टिकट भी ब्लॉक और जिला अध्यक्ष तय करेंगे। संगठन जिसे कहेगा, वह ही विधायक या सांसद बनने का दावेदार होगा।
55 नेताओं की तलाश
सेमरिया के विधायक अभय मिश्रा ने वर्तमान नेतृत्व की काबिलियत पर सवाल उठाते हुए कह दिया कि अभी एक भी ऐसा चेहरा नहीं दिखता जो हमें चुनाव जिता सके। राहुल ने तुरंत इसका प्रतिवाद करते हुए कहा कि ऐसे 10 नेता मैैं गिना सकता हूं जिनमें चुनाव जिताने का माद्दा है। नेतृत्व पर यह भरोसा प्रदेश में पार्टी की आगे की राह कुछ आसान बना सकता है। जिला अध्यक्षों पर बड़ा दांव– कांग्रेस अब जिला अध्यक्षों को ज्यादा पावरफुल बना रही है। राहुल गांधी ने कहा- मैं मध्यप्रदेश में 55 नेता तलाश कर रहा हूं जो एमपी कांग्रेस का भविष्य बनेंगे।
विधायक आरिफ मसूद ने पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में ऐसा सवाल उठाया जिस पर राहुल गांधी भी चौंक उठे। मसूद ने कहा कि संगठन को मजबूत करने और जिला अध्यक्षों का चुनाव जिन ऑब्जर्वर के बल पर किया जा रहा है, वे ही भेदभाव करेंगे तो क्या होगा! राहुल गांधी ने इसे महत्वपूर्ण बताते हुए संगठन महामंत्री के. सी वेणुगोपाल को इसे नोट करने को कहा। यानि अब बड़े नेता भी कार्रवाई की जद में हैं, जवाब तो देना ही होगा।











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