महाकाल मंदिर परिसर में आग, जनहानि नहीं

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उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर परिसर में सोमवार दोपहर को एक आग की घटना सामने आई। मंदिर के गेट नंबर 1 के पास स्थित फैसिलिटी सेंटर की छत पर बने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय में आग लग गई।

आग लगने का कारण और स्थान:

आग लगने का संभावित कारण कार्यालय में लगे इनवर्टर की बैटरी में शॉर्ट सर्किट होना बताया जा रहा है। यह कार्यालय महाकाल मंदिर के गेट नंबर 1 के नजदीक, प्रशासनिक कार्यालय से कुछ ही मीटर की दूरी पर फैसिलिटी सेंटर की पहली मंजिल पर बना हुआ था।

घटना का घटनाक्रम:

यह घटना सोमवार सुबह लगभग 11:30 से 11:45 बजे के बीच हुई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय में काम करने वाली एक निजी कंपनी के कर्मचारी जयदीप Kadape ने मंदिर के कंट्रोल रूम को आग लगने की सूचना दी। उन्होंने बताया कि एमसीबी में शॉर्ट सर्किट के कारण बैटरी और मशीनों में आग लग गई।

दमकल और बचाव कार्य:

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंची और लगभग आधे घंटे के भीतर आग पर काबू पा लिया गया। इस घटना में किसी भी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है, जिससे मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली।

नुकसान:

आग लगने से कार्यालय में रखे उपकरण और अन्य सामग्री जलकर खाक हो गए, जिससे लगभग 5 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

श्रद्धालुओं पर प्रभाव:

हालांकि आग लगने की घटना भक्तों से जुड़े क्षेत्र में नहीं हुई थी, लेकिन इससे कुछ समय के लिए श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई थी। एहतियात के तौर पर पूरे परिसर को तुरंत खाली करा लिया गया था और गेट नंबर 1 से प्रवेश अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। देवास से आए एक श्रद्धालु नवनीत पटेल ने बताया कि शंख द्वार के पास कॉरिडोर से गुजरते समय उन्होंने ऊपर से तेज आवाज सुनी और ऊपर देखने पर आग की लपटें और काला धुआं उठता देखा, जिससे अन्य श्रद्धालु घबराकर प्रशासनिक कार्यालय की ओर भागने लगे। लगभग एक घंटे तक श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ा, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो गई और प्रवेश फिर से शुरू कर दिया गया।

बिजली आपूर्ति और अन्य विवरण:

आग बुझाने से पहले मंदिर के इस क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पूरी तरह से काट दी गई थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लगभग तीन साल पहले महाकाल मंदिर के गेट नंबर 1 के पास पहली मंजिल की छत पर वायु गुणवत्ता निगरानी के लिए एक इकाई कार्यालय स्थापित किया था, जो मंदिर से लगभग 200 मीटर दूर है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक एडी संत के अनुसार, घटना के समय इको टैब सप्लायर नामक एक निजी कंपनी का ऑपरेटर इकाई में मौजूद था। शॉर्ट सर्किट के कारण आग तेजी से मशीनों, बैटरी, एसी और पूरे कार्यालय में फैल गई।

जांच और आगे की कार्रवाई:

मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जुनवाल ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है। कलेक्टर रोशन सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है। मंदिर प्रशासन भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर ध्यान देगा।

यह घटना महाकाल मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के महत्व को दर्शाती है और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता और नियमित रखरखाव की आवश्यकता है।

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