जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आर्थिक रूप से गरीब युवाओं को झटका दिया है। उसने संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षाओं में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के उम्मीदवारों को 9 अवसर तथा आयुसीमा में 5 साल की छूट देने से इनकार कर दिया है।
24 फरवरी को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में बैठने के लिए 5 साल की छूट दी थी। अब उसने सभी 19 याचिकाएं खारिज कर दीं हैं। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। 44 पेज के अपने फैसले में उन्होंने कहा कि संविधान में ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट देने का प्रावधान नहीं है।
कोर्ट ने कहा- आरक्षण मामले में केंद्र और राज्य में मिलने वाले लाभ अलग हो सकते हैं। राज्यों में जनसंख्या के आधार पर सूची बनती है। इस आधार पर केंद्र से मिलने वाले लाभ को चुनौती नहीं दे सकते।
ये याचिकाएं सतना के आदित्य नारायण पाण्डेय व 19 अन्य ने दायर की थी। इनमें केंद्र के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी), यूपीएससी के आदेशों को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को यूपीएससी परीक्षा में अन्य आरक्षित वर्गों की तरह अवसरों में छूट दी जाए।कुछ ने डीओपीटी के तहत भर्तियों में 5 प्रतिशत छूट की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा था।











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