सोमालिया में चीन का प्रभाव बढ़ा, ताइवान पर रोक

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मोगाडिशु। अरब सागर में भारत से स्वेज नहर तक जाने के बीच अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। चीन के दबाव में अफ्रीकी देश सोमालिया ने ताइवान के नागरिकों के अपने देश में प्रवेश पर रोक लगा दी है। यह व्यवस्था बुधवार से लागू हो गई। इस व्यवस्था के तहत ताइवान के पासपोर्ट धारक अब सोमालिया में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। सोमालिया के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने पिछले सप्ताह उसे नई नीति के बारे में सूचित किया था जो बुधवार को लागू हुई।

ताइवान के विदेश मंत्रालय ने इस कदम की पुष्टि की है। यह कदम ताइवान और सोमालीलैंड के बीच बढ़ते संबंधों के बीच उठाया गया है। सोमालीलैंड ने 1991 में सोमालिया से इकतरफा स्वतंत्रता की घोषणा की थी। दुनिया के अधिकांश देशों द्वारा इसे मान्यता नहीं दी गई है। 2020 में ताइवान और सोमालीलैंड ने एक-दूसरे की राजधानियों में दूतावास खोले। इससे सोमालिया और चीन दोनों भड़क गए। इस बीच चीन ने सोमालिया में अरबों डॉलर का निवेश किया तथा लाखों डॉलर की मदद दी। चीन ताइवान को अपने देश का हिस्सा मानता है जबकि ताइवान स्वयं को स्वतंत्र देश बताता है।
सोमालिया अफ्रीका महाद्वीप के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से में स्थित है जिसे अफ्रीका का सींग माना जाता है। अरब सागर से स्वेज नहर होकर यूरोप तक जाने वाले मार्ग पर यह ऐसे जगह पर है जहां से बचकर कोई जहाज निकल नहीं सकता। कुछ वर्ष पहले यहां समुद्री डाकुओं ने कब्जा कर लिया था और वहां से आने-वाले जहाजों को फिरौती लेने के बाद ही छोड़ते थे। अब ऐसा लगता है कि चीन इस क्षेत्र पर नियंत्रण के लिए इसे अपने प्रभाव में ले रहा है।

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