भोपाल की एक स्थानीय अदालत ने व्यापमं परीक्षा में धोखाधड़ी करने के मामले में आरोपी रामकुमार वर्मा को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वर्मा पर एक अभ्यर्थी से उप निरीक्षक की परीक्षा में चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर लाखों रुपये ठगने का आरोप था।
यह मामला वर्ष 2014 में दर्ज हुआ था, जब पीड़ित अभ्यर्थी ने विशेष कार्य बल (STF) में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी ने व्यापमं की SI परीक्षा में पास करवाने का झांसा देकर उससे ₹1.95 लाख ऐंठ लिए थे।
घटना का पूरा विवरण
शिकायतकर्ता ने वर्ष 2011 में मध्य प्रदेश पुलिस की उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा दी थी, लेकिन उसे परिणाम को लेकर शंका थी। इसी दौरान उसके रिश्तेदार ने उसे ग्वालियर में SAF की दूसरी बटालियन में पदस्थ आरक्षक रामकुमार वर्मा से मिलवाया। वर्मा ने भरोसा दिलाया कि वह परीक्षा परिणाम को प्रभावित कर सकता है, और इसके एवज में ₹5 लाख की मांग की।
शिकायतकर्ता ने किश्तों में ₹1.95 लाख वर्मा को दे दिए, लेकिन चयन नहीं हुआ। जब उसने पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने बहाने बनाकर टालमटोल शुरू कर दी।
अदालत का फैसला
इस धोखाधड़ी को गंभीर मानते हुए अदालत ने IPC की धारा 420 के तहत दोषी करार देते हुए तीन साल के कठोर कारावास और ₹10,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
व्यापमं घोटाले से जुड़ाव
व्यापमं (मध्यप्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल) घोटाला राज्य के सबसे चर्चित भर्ती घोटालों में से एक रहा है। इसमें छात्रों, अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से बड़ी संख्या में परीक्षाएं प्रभावित हुई थीं। यह फैसला ऐसे ही एक उपकांड में आया है, जो घोटाले की परतों को उजागर करता है।
निष्कर्ष
यह सजा न सिर्फ आरोपी को उसके अपराध की सज़ा देती है, बल्कि उन हज़ारों ईमानदार छात्रों को न्याय का संदेश देती है जो मेहनत से परीक्षा देते हैं। यह घटना परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता को और भी प्रबल बनाती है।











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