BCLL की राह कठिन, ई-रिक्शा बने भोपाल की नई सवारी

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भोपाल में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहाँ एक ओर भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (BCLL) की बस सेवाओं का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है, वहीं ई-रिक्शा शहर में आवागमन का एक प्रमुख साधन बनकर उभरे हैं। यह स्थिति दैनिक यात्रियों के लिए असुविधा का कारण बन रही है, लेकिन साथ ही ई-रिक्शा चालकों और उपयोगकर्ताओं के लिए एक नया विकल्प भी प्रदान कर रही है।

एक समय था जब BCLL की बसें शहर के 24 विभिन्न मार्गों पर दौड़ती थीं, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर मात्र 6 रह गई है। नतीजतन, यात्रियों को बसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और कई इलाकों में बसों की सुविधा लगभग न के बराबर हो गई है। वर्तमान में, केवल 86 बसें ही चालू हालत में हैं, जिनमें से 5-7 बसें अक्सर मरम्मत के अधीन रहती हैं। यह संख्या उस 368 बसों के बेड़े से काफी कम है जो कभी शहर को सेवाएं प्रदान करती थीं। बसों की इस कमी से यात्रियों की संख्या में भी गिरावट आई है, जिससे BCLL की वित्तीय स्थिति पर और दबाव पड़ा है।

BCLL की बसों की घटती संख्या और अनियमित सेवाओं के कारण ई-रिक्शा ने शहर में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। पिछले साल 7,000 से अधिक ई-रिक्शा पंजीकृत हुए थे, और इस साल इसमें 1,500 की और वृद्धि हुई है। इसके अलावा, शहर में कई अपंजीकृत ई-रिक्शा भी संचालित हो रहे हैं, जो लोगों को किफायती और सुविधाजनक परिवहन विकल्प प्रदान कर रहे हैं। ये ई-रिक्शा छोटी दूरी की यात्राओं के लिए विशेष रूप से लोकप्रिय हो गए हैं, और अब वे शहर के प्रमुख मार्गों पर भी आसानी से उपलब्ध हैं।

BCLL की इस दुर्दशा के पीछे ‘माँ एसोसिएट्स’ नामक पूर्व बस ऑपरेटर के साथ चल रहा कानूनी विवाद भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। इस विवाद ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिससे नई बसों की खरीद और सेवाओं के विस्तार में बाधा आ रही है।

ई-रिक्शा की बढ़ती लोकप्रियता जहां एक ओर स्थानीय परिवहन को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर इनकी बढ़ती संख्या यातायात प्रबंधन के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी कर रही है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में, ई-रिक्शा भोपाल के निवासियों के लिए एक विश्वसनीय और सुलभ विकल्प के रूप में उभर कर सामने आए हैं, खासकर जब सिटी लिंक बसों की सेवाएं लगातार घटती जा रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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