मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी प्रज्ञा का मालेगांव में सम्मान हाईकोर्ट ने दी सम्मान की अनुमति

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मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मालेगांव ब्लास्ट की मुख्य आरोपी का सार्वजनिक सम्मान करने की अनुमति दे दी है। महाराष्ट्र सरकार ने औरंगज़ेब विवाद के कारण इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया था। उसके बाद आयोजक हाई कोर्ट पहुंचे थे। भोपाल से भाजपा सांसद रह चुकीं प्रज्ञा ठाकुर को ‘हिंदू वीर’ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

हाई कोर्ट के जजद्वय रवींद्र घुघे और अश्विन भोबे की बैंच ने हिंदू संगठन सकल हिंदू समाज के समन्वयक द्वारा दायर याचिका को अनुमति दे दी, जिसमें 2008 के मालेगांव विस्फोटों की मुख्य आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सम्मानित करने के लिए 30 मार्च को मालेगांव में गुड़ी पड़वा कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की गई थी।

बैंच ने आयोजकों पर कई सख्त शर्तों के अधीन 30 मार्च को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे के बीच कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दे दी। यह कार्यक्रम ईद से एक दिन पहले आयोजित किया जा रहा है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “भारत की आजादी के 78 साल बाद, हमारे पास यह मानने का हर कारण है कि इस देश की आबादी साक्षर हो रही है और ज्ञान की जीत हो रही है। वक्ता यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जब वे अपने विचार व्यक्त करें, तो उनमें से कोई भी किसी अन्य धर्म के खिलाफ निर्देशित न हो, ताकि अन्य धर्मों के सदस्यों को ठेस न पहुंचे।” उसने कहा कि वह ऐसे मामलों में अत्यधिक संवेदनशील नहीं हो सकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कायम रखने तथा ‘जियो और जीने दो’ के आदर्श वाक्य में विश्वास रखता है।

कोर्ट ने कहा, “हम सभी मानते हैं कि वे जिम्मेदार नागरिक हैं और वे इसे बेहतर समझेंगे। संवेदनशीलता को इस हद तक बढ़ा-चढ़ाकर पेश न किया जाए कि वह अति हो जाए। हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं और हम सह-अस्तित्व में भी विश्वास करते हैं। यह अधिक महत्वपूर्ण है… यदि आपका पड़ोसी खुश हैं।
कोर्ट ने पुलिस को जुलूस के लिए एक विशिष्ट मार्ग निर्धारित करने के आदेश दिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से दूर रहे। सुरक्षा पर होने वाला खर्च आयोजक वहन करेंगे।
इससे पहले, 25 मार्च को, नासिक के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने ठाकुर और अन्य वक्ताओं द्वारा अतीत में दिए गए भड़काऊ बयानों के बारे में पुलिस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इस आयोजन के लिए अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था।

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