भारत का सबसे पॉपुलर ब्रांड कई जगह पर हुआ बैन – बनाने में हुआ कीटनाशक का प्रयोग

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धूम्रपान से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं हार्ट अटैक के चांसेस बढ़ सकते हैं लेकिन आज के इस नए भारत में अगर कोई अपने खाने में स्वाद डालना चाहे तो वह भी आपकी सेहत के लिए हानीकारक हो चुका है

5 अप्रैल 2024 को हांगकांग के फूड सेफ्टी सेंटर की तरफ से पहली नोटिफिकेशन आई थी इन्होंने एमडीएच के तीन मसालों का नाम लिया मद्रास करी पाउडर करी पाउडर और सांभर मसाला इसके अलावा एक एवरेस्ट का प्रोडक्ट फिश करी मसाला इन सब में इथाइन ऑक्साइड की बहुत ज्यादा मात्रा पाई गई एक ऐसा केमिकल है जिसके सेवन से कैंसर का डायरेक्ट लिंक है और कई देशों में इसका इस्तेमाल करना पूरी तरीके से बैंड है सिंगापुर देश की फूड एजेंसी ने अलग से टेस्टिंग करी और एवरेस्ट के फिश करी मसाले में यही चीज पाई

4 मई 2024 जिस दिन मैं ये वीडियो बना रहा हूं सिंगापुर हांगकांग और मालदीव्स के देशों ने इन मसालों को अपने देश में बैन कर दिया है ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड और नेपाल के देशों की फूड एजेंसीज अपनी अलग से टेस्टिंग करा रही हैं और जल्द ही वहां पर भी बैन किया जा सकता है लेकिन कहानी यहां पर खत्म नहीं होती थोड़ा और गहराई से जांच करी तो पता चला

पिछले 4 सालों में यूरोपियन यूनियन की फूड सेफ्टी अथॉरिटीज ने 500 से ज्यादा अधिक इंडियन प्रोडक्ट्स को या तो बैन कर दिया है या रिकॉल कर दिया है 527 ऐसे प्रोडक्ट्स जिनमें इथाइन ऑक्साइड पाया गया फिर से इनमें सिर्फ मसाले ही नहीं बल्कि हर चीज शामिल है नट्स सीड्स हर्ब स्पाइसे सीरियल्स फल सब्जियां फ्लेवर्स आइसक्रीम थिकनर्स और भी बहुत कुछ इतना ही नहीं पिछले छ महीने में एमडीएच ने जितने मसाले अमेरिका में भेजे यूएस कस्टम अथॉरिटीज ने उनमें से 31 पर मसालों को वापस भेज दिया कहा कि उनमें साल्मोनेला पाया गया है ये एक बैक्टीरिया है जिससे फूड पॉइजनिंग होती है दस् लगना फीवर आना वोमिटिंग और सीवियर केसेस में आपके नर्वस सिस्टम को भी चोट पहुंचा सकता है हालत इतनी गंभीर है और यह सारी खबरें हमें सिर्फ इसलिए पता चल पा रही है क्योंकि दूसरे देशों की अथॉरिटीज अपना काम कर रही हैं नहीं तो अपने देश में ना तो टीवी चैनलों में इसे दिखाया जा रहा है और ना ही सरकार की तरफ से कोई चेतावनी आई अरे चेतावनी देना तो छोड़ो मोदी सर सकार ने पिछले महीने पेस्टिसाइड की लिमिट को 10 गुना बढ़ा दिया जितना पेस्टिसाइड आपके मसालों में पाया जाना एक्सेप्टेबल है उसे 10 गुना बढ़ा दिया गया है 140 करोड़ लोगों की जिंदगियों के साथ यहां खेल खेला जा रहा है यहां बात सिर्फ कुछ मसालों की नहीं है यह खेल इससे कहीं ज्यादा खतरनाक है आइए समझते हैं इस वीडियो में गहराई से कि ये कौन से केमिकल्स हैं जो पाए जा रहे हैं क्यों पाए जा रहे हैं क्या इसके पीछे असली कारण है और आप अपनी सेहत को बचाने के लिए यहां पर क्या कर सकते हैं] वीडियो शुरू करने से पहले यहां एक चीज मैं साफ कर दूं इससे पहले कि कुछ लोग रोए कि बार-बार सरकार को क्यों बीच में लाते हो हमारे पापा की इसमें क्या गलती है यहां पर इस बात में कोई दो राय नहीं है कि सारी जिम्मेदारी सरकार के ऊपर है एवरेस्ट कंपनी से जब पूछा गया कि उनके मसाले ऐसे क्यों निकल रहे हैं तो उन्होंने क्या जवाब दिया कि हमें तो नेसेसरी क्लीयरेंसस और अप्रूवल स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया ने ही दिया था स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया क्या है इंडियन गवर्नमेंट की रेगुलेटरी अथॉरिटी है जो कि आती है मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अंडर इसके अलावा हमारे खाने में कैंसरस केमिकल्स हैं या नहीं यह जांच करने की जिम्मेदारी है एफएसएसएआई की फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया जो कि आती है मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के अंडर और ये सिर्फ हमारे देश की बात नहीं है दूसरे देशों के फूड अथॉरिटीज भी उनकी सरकारों के अंडर आते हैं और वो सारे देश कम से कम अपने देशवासियों की हेल्थ की परवाह तो कर रहे हैं कम से कम यह तो कह रहे हैं कि आपका खाना खतरनाक है इन मसालों से दूर रहो हमारी सरकार के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकला है एफएसएसए की तरफ से इकलौता रिस्पांस ये आया है कि हमें 20 दिन चाहिए इन मसालों की टेस्टिंग कराने के लिए फिर हम देखेंगे कि ये हानिकारक है या नहीं इन्हें 20 दिन चाहिए यहां पर एक आम आदमी ने अपनी तरफ से टेस्टिंग करा ली और कुछ ही दिनों के अंदर टेस्ट रिजल्ट्स आ भी गए और एफएसएआई वो यूनिट है जिन्होंने 20 दिन मांगे यह जवाब देने के लिए कि इसके अंदर इथाइल ऑक्साइड प्रेजेंट है या नहीं है मेरा सवाल एफएसएआई से यह है कि अगर मैं 4 दिन के अंदर पता लगा सकता हूं कि इसके अंदर कितना इथाइन ऑक्साइड है तो आपको 20 दिन का टाइम क्यों चाहिए इस रिपोर्ट को देखिए एक के फिश करी मसाले को टेस्टिंग करने के लिए भेजेगा उसने इसे फूड हाइजीन एंड हेल्थ लेबोरेटरी में भेजा 23 अप्रैल को उसने 50 ग्रा मसाले का सैंपल भेजा और 26 अप्रैल को रिपोर्ट तैयार भी होकर आ गई क्या पाया गया इस मसाले में इथाइन ऑक्साइड की मात्रा 7.57 मग्र पर किलोग्राम की कंसंट्रेशन में मौजूद है इसकी लिमिट है 0.1 मिग्रा पर किग्रा यानी कि ये लिमिट से 70 गुना ज्यादा मात्रा में कैंसर कॉजिंग केमिकल मौजूद था अब कुछ लोग बहाने मारते हैं कि दुनिया भर के देशों की ये साजिश है मोदी सरकार को गिराने की इलेक्शन के पहले ही ऐसी खबरें क्यों आती हैं यह खबरें इलेक्शन के पहले नहीं आ रही यह काफी टाइम पहले से आई जा रही है टीवी चैनल बस आपको दिखा नहीं रहे अक्टूबर 2022 और सितंबर 2023 के बीच में अमेरिका ने 15 पर एमडीएच के प्रोडक्ट्स को रिजेक्ट किया था 2020 से लेकर आज तक जैसा मैंने बताया यूरोपियन यूनियन 527 इंडियन प्रोडक्ट्स को रिजेक्ट कर चुका है या बैन कर चुका है और अगर उन देशों पर यकीन नहीं होता तो इस रिपोर्ट को ही देख लो यह तो एक इंडियन ने ही करवाई है एक इंडियन लेबोरेटरी में ही इस इशू की सीरी नेस को समझ गए हो तो आइए अब थोड़ा इस केमिकल इथाइन ऑक्साइड के बारे में जानते हैं इसका शॉर्ट फॉर्म है ओ या ईटीओ ये एक फॉसिल फ्यूल का बायप्रोडक्ट है जिसके इंडस्ट्रियल यूजेस बहुत सारे हैं लेकिन जो यूज हमारे केस में रिलेवेंट है वो है स्पाइसेसफर शब्द का मतलब होता है डिस इफेक्ट करना या स्टेरलाइज करना जितने हानिकारक कीटाणु और बैक्टीरिया होते हैं खाने में उन्हें मारना इथाइन ऑक्साइड का एक गैस के फॉर्म में इस्तेमाल किया जाता है ये गैस किसी भी मटेरियल की पैकेजिंग के थ्रू बड़ी आसानी से फ्लो कर जाती है और काफी आसान और एफिशिएंट तरीके से इसका इस्तेमाल किया जा सकता है डिस इफेक्ट करने के लिए ये गैस अपने आप में कलरलेस है तो आपको दिखेगी नहीं लेकिन फ्लेमेबल जरूर है ये यानी कि आग लग सकती है इस पर इससे ईकोलाई और साल्मोनेला जैसे हार्मफुल बैक्टीरियस को मारा जा सकता है साथ ही साथ फंगस के खिलाफ भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है इंटरेस्टिंग चीज ये है कि फसल उगाते समय इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि मसालों की पैकेजिंग करते समय इसका इस्तेमाल किया जाता है तो अगर मसालों में इथाइन ऑक्साइड की बहुत ज्यादा मात्रा पाई जाती है तो उस किसान की गलती नहीं है जो फसल को उगा रहा है बल्कि उस कंपनी की जिम्मेदारी है जो पोस्ट हार्वेस्ट ट्रीटमेंट के दौरान और पैकेजिंग करने से पहले इथाइन ऑक्साइड का इस्तेमाल कर रही है प्रॉब्लम स्टोरेज के वक्त आ रही है ये एक बड़ा सिंपल सा फ्लो चार्ट आप देख सकते हैं स्क्रीन पर जो अलग-अलग प्रोसेसेस बताता है जो इवॉल्वड हैं इथाइन ऑक्साइड की स्टेरलाइजेशन के दौरान सबसे पहले प्री कंडीशनिंग होती है ह्यूमिडिटी टेंपरेचर प्रेशर कंट्रोल चेक किया जाता है फिर इस गैस के द्वारा स्टेरिन किया जाता है और फिर उस गैस की इवेक्युएशन और गैस वाशिंग करी जाती है ये जो तीसरा प्रोसेस है इसका नाम है एरिए और ये बहुत-बहुत जरूरी प्रोसेस है क्योंकि यहां पर इस केमिकल को वापस से बाहर निकालने का काम किया जाता है नाइट्रोजन इंजेक्शंस और वैक्यूम डीगैसिंग का इस्तेमाल किया जाता है इस केमिकल को खत्म करने के लिए ये बहुत इंपॉर्टेंट इसलिए है क्योंकि इसी स्टेप पर प्रॉब्लम आती है अगर खाने की स्टेरिन कर ली ईटीओ से लेकिन उसके बाद इसकी रिएशन ढंग से नहीं करी गई तो केमिकल की कुछ ट्रेसेस खाने में बच जाएंगे इससे कुछ और हानिकारक केमिकल कंपाउंड्स की फॉर्मेशन होगी जैसे कि टू क्लोरो इथेनॉल या इथाइन क्लोरोहाइड्रेट ये वही हानिकारक केमिकल्स हैं वैसे जो कफ सिरप्स में भी पाए गए थे इसकी बात मैंने फार्मा फाइल्स वाले वीडियो में करी थी वही कफ सिरप्स जिनकी वजह से बच्चों की मौत हो गई थी उज्बेकिस्तान में और यही कारण है कि इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर इथाइन ऑक्साइड को ग्रुप वन कार्सिनोजेन की कैटेगरी में डालती है इन्होंने चार अलग-अलग ग्रुप्स बना रखे हैं क्लासिफिकेशन के ग्रुप वन में वो चीजें हैं जिनसे फॉर शोर इंसानों को कैंसर होता है ग्रुप टू ए में वो चीजें हैं जिनसे प्रोबेबली कैंसर होता है इंसानों को ग्रुप टू बी में वो चीजें हैं जिनसे पॉसिबली हो सकता है कैंसर इंसानों को और ग्रुप थ्री वाली चीजें नॉन क्लासिफाई बल है तो ग्रुप वन वाली चीजें सबसे ज्यादा खतरनाक है एक ये लिस्ट देख सकते हो अलग-अलग केमिकल्स की जो ग्रुप वन में आते हैं कई सारी चीजें आती हैं इसमें जैसे कि कोयला टोबैको एलुमिनियम की प्रोडक्शन डीजल इंजन का एग्जॉस्ट और इनमें से एक एंट्री यहां पर इथाइन ऑक्साइड की भी है इसके बारे में तो यह तक कहा गया है कि इवन लो लेवल्स पर इथाइन ऑक्साइड से लिंफाइड कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है अगर आप इस गैस को इन्हेल करते हो इससे सेल्यूलर मटेरियल में आपके परमानेंट म्यूटेशंस हो सकती हैं जो कि आपकी आने वाली पीढ़ियों में भी पास ऑन करी जा सकती हैं यही कारण है कि यूरोपियन यूनियन की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है इथाइन ऑक्साइड को लेकर ना सिर्फ इन्होंने अपने सारे यूरोपियन देशों में कंप्लीट बैन कर दिया इथाइन ऑक्साइड को बल्कि ये भी कहा कि इंपोर्टेड चीजों में भी इथाइन ऑक्साइड बैंड है इस पॉलिसी में एक थोड़ा सा बदलाव आया था साल 2003 में जब इन्होंने देखा कि इंपोर्टेड खाने में माइक्रोबिट कंटेम मेशन का रिस्क काफी ज्यादा है तो इसको मध्य नजर रखते हुए उन्होंने कहा कि ठीक है इंपोर्टेड खाने में हम बहुत थोड़ी सी मात्रा का एथलीन ऑक्साइड अलाव करेंगे इन्होंने एक मैक्सिमम रेसिड्यू लिमिट डिफाइन करी 0.2 मिग्रा पर किग्रा की मतलब ईटीओ का इतना सा रेसिड्यू रह गया तो चलता है लेकिन इससे ज्यादा अलाउड नहीं है लेकिन इस लिमिट को भी 2022 में यूरोपियन कमीशन ने और भी कम कर दिया इन्होंने कहा 0.2 भी नहीं 0.1 मिग्रा पर किग्रा नई लिमिट होगी तो आज के दिन ईटीओ की इतनी एक्सेप्टेबल लिमिट है यूरोप में और वो भी सिर्फ इंपोर्ट किए जाने वाली चीजों में जो चीजें यूरोप के अंदर बन रही हैं उनमें कंप्लीट बैंड है ईटीओ का इस्तेमाल पिछले साल अप्रैल 2023 में इन्होंने ईटीओ की क्लासिफिकेशन भी बदल दी इन्होंने कहा हम इसे फ्यूम गेंट्स इड रेसिड्यू बुलाएंगे इस डेफिनेशन को बदलने का मतलब था कि हर एक यूरोपियन देश के लिए यह मैंडेटरी बन गया वो अपने फूड सैंपल्स की टेस्टिंग कराए ईटीओ को लेकर सिंगापुर की बात करी जाए सिंगापुर की जो मैक्सिमम अलाउड लिमिट है थालियम ऑक्साइड की वो यूरोप से कहीं ज्यादा है 50 मिग्रा पर किग्रा इनके देश में फ्यूम केशन के तौर पर ईटीओ का इस्तेमाल करना अलाउड है लेकिन जो लिमिट है इनकी 500 गुना ज्यादा है ये यूरोप की लिमिट से और फिर भी जब इन्होंने एवरेस्ट के फिश करी मसाला की टेस्टिंग करी तो अपनी लिमिट से ज्यादा इन्होंने ये केमिकल पाया हांगकांग की बात करें तो इस मामले में हांगकांग की रेगुलेशन ज्यादा मजबूत है सिंगापुर से ये ना सिर्फ ईटीओ को एक पेस्टिसाइड कंसीडर करते हैं बल्कि इनके देश में इसे फ्यूम केशन के तौर पर इस्तेमाल करना अलाउड ही नहीं है और ना ही इसे पेस्टिसाइड के तौर पर इस्तेमाल करना अलाउड है अगर हांगकांग में फूड क्वालिटी को लेकर वायलेशन होती है तो $50000 का फाइन लग सकता है और 6 महीने की जेल हो सकती है यह सब सुनकर अगर आप टेंशन में आ रहे हो और आपको लग रहा है कि यार भगवान जाने क्या-क्या डला है हमारे खाने में कौन-कौन से हानिकारक केमिकल्स हैं तो चिंता मत करो चैट जीपीटी जैसा एआई टूल यहां पर आपकी बहुत मदद कर सकता है किसी भी खाने के आइटम की इंग्रेडिएंट्स देखो पीछे और किसी भी इंग्रेडिएंट्स पोटैशियम ब्रोमेट ये कई ब्रेड्स में इस्तेमाल किया जाता है सीधा पूछो इज पोटैशियम ब्रोमेट बैड फॉर हेल्थ एंड इज इट बैंड इन एनी कंट्री आपको जवाब मिल जाएगा क्लियर कि इसे यूरोप और कनाडा जैसे देशों में बैन किया गया है लेकिन अमेरिका में ये अभी भी अलाउड है और ये हानिकारक है हेल्थ के लिए एक-एक इंग्रेडिएंट्स इंग्रेडिएंट्स की फोटो खींच के भी आप डाल सकते हो और पूछो चैट जीपीटी से इतने सारे जो इंग्रेडिएंट्स यहां पर डले हैं इनमें से कोई भी मेरी हेल्थ के लिए हानिकारक है क्या बहुत अच्छा ब्रेकडाउन यहां पर आपको मिल जाएगा जैसा आप स्क्रीन पर देख सकते हैं चैट जीपीटी डेली लाइफ में ऐसी चीजों के लिए बहुत यूजफुल है नॉर्मली ऐसी चीजों को अगर आप google3 अकेडमी पर मैंने एक पूरा 52 घंटे का कोर्स बना रखा है मास्टर चैट जीपीटी के ऊपर आप अपनी पढ़ाई में अपने काम में अपनी डेली लाइफ में चीजों को 10 गुना ज्यादा स्पीड से कर सकते हैं इसकी मदद से इस कोर्स में मैं रेगुलर अपडेट्स भी डालता हूं नेक्स्ट अपडेट जून 2024 में आएगा अगर आपने अभी तक जवाइन नहीं किया है तो नीचे जाकर डिस्क्रिप्शन में इसका लिंक मिल जाएगा या फिर इस क्यूआर कोड को भी स्कैन कर सकते हैं कूपन कोड इस्तेमाल कीजिए फूड 40 40 पर ऑफ पाने के लिए एक और चीज कहना चाहूंगा आप में से जिन लोगों को चैट जीपीटी का सब्सक्रिप्शन खरीदना महंगा लगता है इस ऐप को ट्राई करके देखिए गनी a वही सेम फीचर्स और परफॉर्मेंस चट जीपीटी वाली लेकिन चैट जीपीटी से ये आधी से कम कॉस्ट पर अवेलेबल है इसमें तो डायरेक्टली फोटो चैट और पीडीएफ चैट अवेलेबल है आप इंग्रेडिएंट्स की फोटो खींच कर इससे भी आप पूछ सकते हैं सेम जवाब मिलेगा लिंक डिस्क्रिप्शन में है अब टॉपिक पर वापस आते हैं इतना सब हो जाने के बावजूद एवरेस्ट के जो डायरेक्टर हैं राजीव शाह वो कहते हैं कि 60 में से सिर्फ एक फिश करी मसाला में ही तो ईटीओ निकला है तो बाकी सारे मसाले खाने लायक हैं और दूसरी तरफ एमडीएच का भी यही दावा है कि सारे प्रोडक्ट्स इनके सेफ हैं और आराम से खाने लायक हैं लेकिन पता है क्या दोस्तों बात यहां पर सिर्फ इथाइन ऑक्साइड की नहीं है जैसा मैंने वीडियो के शुरू में बताया था अमेरिका में जो एमडीएच मसालों की शिपमेंट्स को रिजेक्ट किया किया गया वो साल्मोनेला की वजह से किया गया आयरन की बात देखो यहां पर क्या है मैंने आपको बताया था टीयू का इस्तेमाल किया जाता है साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया को मारने के लिए तो यहां कुछ मसालों में ईटीओ पाया जा रहा है कुछ मसालों में साल्मोनेला पाया जा रहा है यूएस की एफडीए ने बताया कि अक्टूबर 2022 और सितंबर 2023 के बीच में 15 पर एमडीएच के जो मसाले इंपोर्ट किए जा रहे थे अमेरिका में उन्हें रिफ्यूज कर दिया गया साल्मोनेला की वजह से लेकिन इसके अगले पीरियड में अक्टूबर 2023 से लेकर जो अभी तक का समय है यह रिजेक्शन का रेट 31 पर पर था टोटल में 11 शिपमेंट्स को रिजेक्ट किया गया जिनमें स्पाइसे फ्लेवर्स और सल्ट्स थे एमडीएच के और एक शिपमेंट का मतलब यहां पर एक प्रोडक्ट नहीं है एक शिपमेंट यहां पर एक कार्टन भी हो सकता है एक ट्रक लोड भी हो सकता है और एक पूरे जहाज का कंटेनर भी हो सकता है इस आउटलुक के आर्टिकल के अनुसार जनवरी 2022 में यूएस के एफडीए ने एमडीएच के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का फिजिकल इंस्पेक्शन भी किया था इंडिया में आकर उस वक्त खतरा इतना ज्यादा नहीं था लेकिन तब भी एफडीए ने ये नोट किया था कि प्लांट में एडिक्ट सैनिटरी फैसिलिटी और अकोमोडेशंस नहीं है एज कोड सुनिए इक्विपमेंट और यूटेंसिल्स इनके इस तरीके से डिजाइन ही नहीं किए गए कि उन्हें क्लीन किया जा सके मेंटेन किया जा सके कंटेम के अगेंस्ट प्रोटेक्ट किया जा सके बात यहां सिर्फ एमडीएच के मसालों की नहीं है फाइनेंशियल ईयर 2020 और 2023 के बीच में अमेरिका ने 786 शिपमेंट्स को रिजेक्ट किया जो इंडिया से आ रही थी टोटल में 3925 ह्यूमन फूड एक्सपोर्ट की शिपमेंट्स इंडिया से यूएस भेजी गई थी यानी कि 20 पर रिजेक्ट हो गई साल्मोनेला की वजह से इसमें सिर्फ मसाले ही नहीं थ थे इसमें विटामिंस मिनरल्स प्रोटींस बेकरी प्रोडक्ट सी फूड प्रोडक्ट्स भी थे हेडलाइन पढ़ो इस आर्टिकल की क्या है इंडिया से जो आने वाला सामान है उसका रिजेक्ट होने का चांस सात गुना ज्यादा है चाइना से आने वाले सामान के कंपैरिजन में हमारे देश के स्टैंडर्ड्स को इतना गिरा दिया गया है और बात यहां सिर्फ इथाइन ऑक्साइड और सालमोनेला तक सीमित नहीं रहती पिछले साल की इस खबर को भी देखो 14 नवंबर 2023 यूरोपियन कमीशन ने अलार्म साउंड किया इंडिया से आने वाले टर्मरिक को लेकर जहां पर एक खतरनाक जानलेवा पेस्टिसाइड क्लो पाय रीफोर्स पाया गया यह पेस्टिसाइड कई देशों में बैंड है क्योंकि इससे बच्चों की ब्रेन ग्रोथ पर फर्क पड़ता है इसलिए मैं कह रहा हूं कि ये प्रॉब्लम कुछ मसालों से कहीं ज्यादा बढ़कर है और ये चीजें पिछले कई सालों से देखी जा रही हैं यूरोप में चेतावनी की घंटी साल 2020 में बेल्जियम के द्वारा बजाई गई थी जब भारतीय सेसमी सीड्स यानी तिल में इथाइन ऑक्साइड पाया गया था तब से लेकर आज तक ये इतनी सारी चीजों में पाया जा चुका है सीरियल्स चॉकलेट्स बिस्किट्स ब्रेड क्रैकर स्पाइसेज और तो और खेतों में जो जानवरों को खाना खिलाया जाता है उसमें भी यह पाया गया इस बेल्जियम वाले इंसीडेंट के बाद ही था कि यूरोपियन फूड सेफ्टी एजेंसी ने इंडियन इंपोर्टेड खाने को सीरियसली लेना शुरू किया इनका एक ये इंफॉर्मेशन नेटवर्क है यूरोपियन रैपिड अलर्ट सिस्टम फॉर फूड एंड फीड जिसका शॉर्ट फॉर्म है आर एसएफएफ इनका जो डाटा होता है यह पब्लिकली अवेलेबल है तो आप खुद भी जाकर चेक कर सकते हो इनकी वेबसाइट पर मार्च 2019 और मार्च 2024 के बीच में इंडियन इंपोर्टेड चीजों को लेकर 985 आरएएस एफएफ की नोटिफिकेशंस आई हैं जिन्हें सीरियस कैटेगरी में डाला गया है यह कोई नेक्सस नहीं है यह सिर्फ एक ऐसी व्यवस्था है जो यूरोप ने अपने देश के नागरिकों की सेफ्टी के लिए बनाई है इनकी कोशिश है कि लोगों को पता चले कि एगजैक्टली किस खाने में क्या-क्या पाया जा रहा है इस वेबसाइट का लिंक मैंने डिस्क्रिप्शन में नीचे डाल दिया है आप जाकर खुद देख सकते हैं और स्क्रीन पर इसके कुछ एग्जांपल्स देखिए मई 2022 और अप्रैल 2022 की नोटिफिकेशंस क्यूमिन और फेन ग्रीक में क्लोर पायरी फोस पेस्टिसाइड पाया गया फिनलैंड में बॉर्डर पे ही इसे रिजेक्ट कर दिया गया नेदर जैंड्स में इसका अलर्ट आया दोनों को सीरियस क्लासिफिकेशन में डाला है आप इनकी वेबसाइट का सर्च सिस्टम भी इस्तेमाल कर सकते हैं अलग-अलग प्रोडक्ट्स को देखने के लिए जैसे कि एला टॉक्सिंस पाए गए पीनट बटर ग्राउंड नट्स चावल में जो इंडिया से आ रहे थे सलम लेना पाया गया सेसमी सीड्स अनियन पाउडर बीटल लीव्स में जो इंडिया से आ रहे थे मरक्यूरी और लेड जैसे हानिकारक केमिकल्स पाए गए आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स में जो इंडिया से इंपोर्ट किए जा रहे थे एक-एक नोटिफिकेशन पे आप डिटेल्स में जाकर नीचे स्क्रॉल करके भी देख सकते हैं कि एगजैक्टली कितना मरकरी कितना लेड पाया गया ऐसे प्रोडक्ट्स को लेकर थैंकफूली हमारे देश में जुडिशरी है जो अभी भी कुछ कुछ हद तक इंडिपेंडेंटली काम कर पा रही है इन्हें लपेटे में लिया इन्होंने अभी आपने रिसेंट खबर में देखा होगा वरना हमारी जो हेल्थ मिनिस्ट्री थी और एफएसएसएआई जो है इन्होंने तो खुली छूट दे रखी है जैसे मर्जी झूठे प्रचार करते रहो याद है 2015 में दोस्तों हमारी सरकार ने मैगी को बैन कर दिया था क्योंकि उसमें एमएसजी के ट्रेसेस पाए गए थे इसके एकदम बाद पतंजलि नूडल्स को लॉन्च किया पूरे देश भर में बड़ी लॉन्च हुई लेकिन अब जब पूरी दुनिया में देश के इतने सारे प्रोडक्ट्स पर बैन लगाया जा रहा है तो हमारी सरकार कुछ नहीं कह रही सोच सकते हो इतने सारे केमिकल्स इतने सारे पेस्टिसाइड्स जिनको लेकर ये एफएसएसएआई वाले अभी तक इतनी सारी खबरें आने के बावजूद भी कोई चेतावनी नहीं दे रहे देश में हालत सही में बहुत खराब है और बहुत गंभीर है एक स्टडी करी गई थी पेस्टिसाइड्स एक्शन नेटवर्क इंडिया के द्वारा इन्होंने पाया कि 275 पेस्टिसाइड जो इंडिया में इस्तेमाल किए जाते हैं उनमें से 255 टॉक्सिक पॉयजंस हैं और 56 कार्सिनोजेनिक है ये 2017 में स्टडी करी गई थी आज के दिन 292 पेस्टिसाइड्स इस्तेमाल किए जा रहे हैं देश में बच्चे स्पेशली सबसे ज्यादा वल्नरेबल है क्योंकि बच्चों की ब्रेन ग्रोथ और डेवलपमेंट पर इसका असर पड़ता है अब कुछ लोग सोचेंगे कि ऑर्गेनिक खाना यहां पर एक सॉल्यूशन हो सकता है जो कि मेरी राय में डेफिनेटली बेटर ऑप्शन है लेकिन ऑर्गेनिक खाने में भी दो प्रॉब्लम्स आती हैं पहला तो यह कि कितने लोग उस टाइप के खाने को अफोर्ड कर सकते हैं और दूसरी प्रॉब्लम इंडिया का जो ऑर्गेनिक खाना है वो भी एक रिस्क बताया जा रहा है अमेरिका और यूरोप के द्वारा 11 जनवरी 2021 अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर ने इंडिया की एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी के साथ अपनी एग्रीमेंट खत्म कर दी इस एग्रीमेंट के तहत इंडिया के बिजनेसेस इंडिया में बनने वाले ऑर्गेनिक खाने को यूएसडीए का ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन दे सकते थे लेकिन अमेरिका इस एग्रीमेंट से पीछे हट गया यह कहकर कि इंडिया का जो ऑर्गेनिक कंट्रोल सिस्टम है वो इंसफिशिएंट है वो हमारे स्टैंडर्ड्स मीट नहीं कर रहा और इसलिए हमारा लेबल ऑर्गेनिक का वो लोग इस्तेमाल करें हमारे लेबल की जो रेपुटेशन है वो नीचे गिर जाएगी यूरोप में मार्च 204 में पब्लिश हुई इस साइंटिफिक रिपोर्ट को देखिए इसे यूरोपियन यूनियन के ईएएसए ने पब्लिश किया है इसमें में लिखा है इंडिया से आने वाले ऑर्गेनिक ड्राई बींस राइस और क्यूमन सीड्स जैसे खाने में क्लोर पायरी फॉस पेस्टिसाइड पाया गया यानी आप ऑर्गेनिक खाना खाओगे तो भी कोई गारंटी नहीं है कि उसमें पेस्टिसाइड नहीं मिलेंगे हालांकि फिर भी मैं कहूंगा ये एक बेटर चॉइस है अगर आप अफोर्ड कर सकते हो तो अब इतना कुछ हो जाने के बावजूद सबसे बेशर्मी वाली चीज जो मोदी सरकार ने करी वो थी ये 8 अप्रैल 2024 को एफएसएसएआई के द्वारा एक नोटिफिकेशन आती है इसमें लिखा जाता है कि पेस्टिसाइड्स की एमआरएल यानी कि मैक्सिमम रेसिड्यू लिमिट बढ़ा दी जाएगी कोई छोटे-मोटे नंबर से नहीं बल्कि 10 गुना ज्यादा 10 गुना ज्यादा बढ़ा दी सरकार ने पेस्टिसाइड की लिमिट पहले 0.01 मिग्रा पर किलोग्राम पेस्टिसाइड एक्सेप्टेबल था खाने में अब इन्होंने कहा 0.1 मिग्रा पर किलोग्राम पेस्टिसाइड एक्सेप्टेबल है एफएसएसएआई ने इस नोटिफिकेशन में बताया कि ये फिगर्स प्रॉपर फील्ड ट्रायल्स के बाद सेट किए गए हैं लेकिन पेस्टिसाइड एक्शन नेटवर्क इंडिया ने इस मैंडेट को लेकर ऑब्जेक्शन रेज किया इन्होंने कहा कि सीआईबस तो फील्ड ट्रायल्स कंडक्ट ही नहीं करता पेस्टिसाइड्स के जितना भी डाटा है वो सारी मैन्युफैक्चरिंग कंपनीज के द्वारा प्रोवाइड किया जाता है और सीआईबस तो सिर्फ अप्रूव करता है पेस्टिसाइड्स को उस डाटा के आधार पर जब लोगों ने इस खबर को लेकर सोशल मीडिया पर हल्ला मचाना शुरू किया कि ये क्या हो रहा है तो एफएसएसएआई ने अपने आप को डिफेंड करने के लिए कहना शुरू कर दिया ये तो झूठी खबर है हमें बदनाम करने की कोशिश करी जा रही है इस न्यूज़ आर्टिकल को देखिए एफएसएसएआई कह रहा है कि ये रिपोर्ट जो है कि हमने 10 गुना लिमिट बढ़ा दी है यह फॉल्स और मेलिश अस रिपोर्ट्स हैं इंडिया के तो सबसे स्ट्रिक्ट स्टैंडर्ड्स हैं अच्छा भाई क्या गलत खबर फैलाई जा जरा देखें क्या इनका डिफेंस था यह कहते हैं हमने लिमिट तो बढ़ाई है हमने 10 गुना लिमिट बढ़ाई है लेकिन सिर्फ उन्हीं पेस्टिसाइड्स के लिए जो सीआई बीआरसी से रजिस्टर्ड नहीं है सीआई बीआरसी है सेंट्रल इंसेक्टिसाइड बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमिटी इंडिया की मतलब ये तो एडमिट कर रहे हैं कि कुछ पेस्टिसाइड्स के लिमिट इन्होंने बढ़ाई है तो पहला सवाल तो यही कि क्यों बढ़ाई है इन्हीं का ही अगस्त 2022 का ऑर्डर देखो इनकी खुद की वेबसाइट पर तीसरे पॉइंट के सेकंड सेक्शन में लिखा है वो पेस्टिसाइड्स जो रजिस्टर्ड नहीं है सीआई बीआरसी के साथ उनकी भी डिफॉल्ट लिमिट 0.01 मिलीग्राम्स पर किलोग्राम होगी अपने पुराने ऑर्डर में तो इन्होंने लिमिट कम रखी थी इन्हीं पेस्टिसाइड्स की लेकिन अब ये लिमिट बढ़ा दी गई है क्यों एफएसएसएआई का यहां पर एक और बहाना है कि हमने डिफॉल्ट लिमिट इसलिए बढ़ा दी क्योंकि जो इंपोर्टेड खाना इंडिया में आएगा भारत के देशों से उनके देशों में लिमिट जो होगी वो थोड़ी ज्यादा हो सकती है इसलिए उस खाने के लिए हम लिमिट को बढ़ा रहे हैं मतलब दूसरी कंट्रीज पर अपना ब्लेम डाल दो बाहर से आने वाले खाने में ज्यादा पेस्टिसाइड डला है तो अपने देशवासियों को ज्यादा पेस्टिसाइड वाला खाना खिला दो मतलब हमारी सरकार बिल्कुल उल्टा कर रही है जो डेवलप कंट्रीज कर रही हैं उनका यूरोपियन यूनियन हांगकांग सिंगापुर ये क्या कर रहे हैं ये अपने देश की रेगुलेशंस कम नहीं कर रहे ये अपने देश की रेगुलेशंस को स्ट्रिक्ट रख रहे हैं ताकि इंपोर्टेड खाना भी उनके देशवासियों को अच्छा क्वालिटी का मिल सके बिना पेस्टिसाइड्स के मिल सके और एफएसएसएआई को अगर इतनी ही चिंता है बाहर से आने वाले खाने की तो जरा यह बता दो मुझे आज तक इतिहास में इन्होंने कितनी बार इंडियन सिटीजंस को वार्निंग दी है चेतावनी दी है कि बाहर से आने वाले खाने में ज्यादा पेस्टिसाइड था कभी भी इनकी तरफ से कोई चेतावनी सुनी है आपने क्या मोदी सरकार को यहां पर चंदा दि दिया जा रहा है इन पेस्टिसाइड कंपनियों के द्वारा क्या एक और चंदा धंधा मॉडल यहां पर छिपा है यहां बात सिर्फ हम कंज्यूमर्स की नहीं है बल्कि किसानों की भी है बीएमसी पब्लिक हेल्थ डाटा के अनुसार दुनिया भर में 11000 फार्मर्स मारे जाते हैं हर साल पेस्टिसाइड्स की वजह से इनमें से करीब 6500 फार्मर्स इंडियन होते हैं यानी कि दुनिया भर में मारे जाने वाले 60 पर किसान सिर्फ हमारे एक देश में मारे जा रहे हैं ये नंबर्स भी यहां पर अंडर रिपोर्टेड है और कोई कानून नहीं है जो यहां पर किसानों की सेफ्टी शोर करता हूं सेफ्टी तो छोड़ो खाने की मिलावट की खबर सुनते ही लोग सबसे पहले इल्जाम किसानों पर लगाते हैं लेकिन जैसा मैंने बताया इथाइन ऑक्साइड की जब ज्यादा मात्रा पाई जा रही है खाने में ये प्रोडक्शन के दौरान नहीं हो रही है ये स्टोरेज और पोस्ट प्रोडक्शन के टाइम पर होती है और पेस्टिसाइड्स की बात करी जाए तो कंपनीज इतना प्रेशराइज कर रही है किसानों को कि जबरदस्ती और पेस्टिसाइड छिड़ को किसानों को यह कहा जा रहा है कि अच्छी फसल तभी मिलेगी जब और ज्यादा पेस्टिसाइड छिड़का जाएगा डेकन रल्ड के आर्टिकल में ये किसान का कहना था हमें कंपनीज कहती हैं कि प्लांटिंग करने से पहले ही पेस्टिसाइड छिड़क दो सीड्स के ऊपर अलग केमिकल डले होते हैं इनफैक्ट जो बायो पेस्टिसाइड्स होते हैं जो कि नेचुरली अरिंग केमिकल्स होते हैं उनके नाम पर भी अब केमिकल्स का कॉकटेल बेचा जा रहा है 2015 में हमारी सरकार ने एक एक्सपर्ट कमेटी बिठाई थी अंडर द चेयरमैनशिप ऑफ डॉट अनुपम वर्मा इस कमेटी ने 66 पेस्टिसाइड्स को रिव्यू किया जो कि दुनिया के किसी ना किसी देश में बैंड है लेकिन इंडिया में अभी भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं इस कमेटी ने जब अपनी रिपोर्ट सबमिट करी तो उसमें कहा गया कि सरकार को कम से कम 13 पेस्टिसाइड्स को बैन करना चाहिए और छह और पेस्टिसाइड्स को फेज आउट करना चाहिए बाय द ईयर 2020 पर इस कमेटी की बात सुनने में सरकार ने खुद ही 4 साल का समय लगा दिया जनवरी 2019 में 12 पेस्टिसाइड्स को फाइनली जाकर बैन किया गया और छह को दिसंबर 2020 तक फेज आउट करने का प्लान बनाया गया पांच साल का डिले कर दिया सरकार ने और सुनो 14 मई 2020 को सेंट्रल गवर्नमेंट की तरफ से एक ड्राफ्ट ऑर्डर आता है कि वो जो 66 पेस्टिसाइड मेंशन किए गए थे उनमें से 27 को बैन कर देना चाहिए लेकिन इस बैन को लेकर यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स सपोज करती है और सरकार एक यू टर्न ले लेती है फरवरी 2023 3 साल बाद एक और नोटिफिकेशन जारी करी जाती है सरकार के द्वारा इस बार कहा जाता है कि उन 27 में से सिर्फ तीन ही पेस्टिसाइड्स को बैन किया जाएगा ध्यान दो यहां पर 27 में से 24 पेस्टिसाइड्स काफी सारे देशों में पूरी तरीके से बैंड है लेकिन हमारी मोदी सरकार को लगता है कि सिर्फ तीन ही बैन करने का डिसीजन लेना काफी है क्या कारण है कि हमारी सरकार एफएमसीजी कंपनीज और पेस्टिसाइड कंपनीज को इस तरीके से फ्री हैंड देती है इवन जो विदेश की कंपनीज इंडिया में आती हैं उन्हें भी इस तरीके से स्टैंडर्ड्स को एक्सप्लोइट करने दिया जाता है फूड फार्मर के वीडियो जरूर आपने देखे होंगे कितनी ही कंपनीज के कितने ही प्रोडक्ट्स को उसने कट घरे में रखा है नेसले किट कैट सेरेलक लेज पिंगल स्किटल्स एमएन एम्स कैडबरी बोन वटा हाल ही में इंडिगो एयरलाइंस के खाने को भी एक्सपोज किया कैसे उनके सो कॉल्ड हेल्दी खाने में भी उपमा पोहा दाल चावल में ज्यादा सोडियम की मात्रा होती है मैगी से लेकिन ये सारी कंपनीज क्या जवाब देती हैं कि हम जो कर रहे हैं वो कानून के दायरे में रहकर कर रहे हैं जो गाइडलाइंस सरकार ने बनाई है एफएसएसएआई ने जो गाइडलाइंस बनाई है हम तो उसे फुलफिल कर रहे हैं तो चाहे दोस्तों यहां पर इंडियन फूड कंपनीज हो एमएनसी हो केमिकल्स हो पेस्टिसाइड्स हो कोल्ड ड्रिंक बेचने वाली कंपनीज हो नेचुरल आयुर्वेदा के स्कैम्स हो सरकार के कंट्रोल में कुछ नहीं रहा यह बिक गई है गवर्नमेंट अब गवर्नमेंट में कुछ नहीं है प्रधानमंत्री मोदी वहां अपने भाषणों में बिजी है मंगलसूत्र मटन और मुसलमानों के नाम पर लोगों को डराने में और यहां लोगों को ज रीला खाना खिलाया जा रहा है सही मायने में इसका जो सॉल्यूशन है वो सरकार की तरफ से ही आ सकता है अगर सरकार अपने रेगुलेशंस को स्ट्रिक्ट बनाए अगर सरकार का ये चंदा धंधा मॉडल खत्म किया जाए तो एज एन इंडिविजुअल हम अपनी तरफ से कोशिश कर सकते हैं कि ऑर्गेनिक खाना खरीदें अगर आप किसी किसान को जानते हैं तो डायरेक्टली उनसे खरीदिए ताकि क्वालिटी का आपको पता चल पाए और इथाइन ऑक्साइड को लेकर क्योंकि स्टोरेज में प्रॉब्लम आ रही थी तो जितना फ्रेश खाना हो सके उसे खरीदिए अगर आपको किसी खाने की क्वालिटी को लेकर डाउट होता है तो आप अपनी तरफ से भी फूड आइटम्स को भेज सकते हैं क्वालिटी टेस्ट कराने के लिए अलग-अलग लेबोरेटरीज में जैसा कि मैंने शुरू में वीडियो के एग्जांपल बताया था कि एक हमारे खाने को जहरीला बना दिया है बल्कि हमारी दवाइयों को भी जहरीला बना दियाधूम्रपान से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं हार्ट अटैक के चांसेस बढ़ सकते हैं लेकिन आज के इस नए भारत में अगर कोई अपने खाने में स्वाद डालना चाहे तो वह भी आपकी सेहत के लिए हानीकारक हो चुका है

5 अप्रैल 2024 को हांगकांग के फूड सेफ्टी सेंटर की तरफ से पहली नोटिफिकेशन आई थी इन्होंने एमडीएच के तीन मसालों का नाम लिया मद्रास करी पाउडर करी पाउडर और सांभर मसाला इसके अलावा एक एवरेस्ट का प्रोडक्ट फिश करी मसाला इन सब में इथाइन ऑक्साइड की बहुत ज्यादा मात्रा पाई गई एक ऐसा केमिकल है जिसके सेवन से कैंसर का डायरेक्ट लिंक है और कई देशों में इसका इस्तेमाल करना पूरी तरीके से बैंड है सिंगापुर देश की फूड एजेंसी ने अलग से टेस्टिंग करी और एवरेस्ट के फिश करी मसाले में यही चीज पाई

4 मई 2024 जिस दिन मैं ये वीडियो बना रहा हूं सिंगापुर हांगकांग और मालदीव्स के देशों ने इन मसालों को अपने देश में बैन कर दिया है ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड और नेपाल के देशों की फूड एजेंसीज अपनी अलग से टेस्टिंग करा रही हैं और जल्द ही वहां पर भी बैन किया जा सकता है लेकिन कहानी यहां पर खत्म नहीं होती थोड़ा और गहराई से जांच करी तो पता चला

पिछले 4 सालों में यूरोपियन यूनियन की फूड सेफ्टी अथॉरिटीज ने 500 से ज्यादा अधिक इंडियन प्रोडक्ट्स को या तो बैन कर दिया है या रिकॉल कर दिया है 527 ऐसे प्रोडक्ट्स जिनमें इथाइन ऑक्साइड पाया गया फिर से इनमें सिर्फ मसाले ही नहीं बल्कि हर चीज शामिल है नट्स सीड्स हर्ब स्पाइसे सीरियल्स फल सब्जियां फ्लेवर्स आइसक्रीम थिकनर्स और भी बहुत कुछ इतना ही नहीं पिछले छ महीने में एमडीएच ने जितने मसाले अमेरिका में भेजे यूएस कस्टम अथॉरिटीज ने उनमें से 31 पर मसालों को वापस भेज दिया कहा कि उनमें साल्मोनेला पाया गया है ये एक बैक्टीरिया है जिससे फूड पॉइजनिंग होती है दस् लगना फीवर आना वोमिटिंग और सीवियर केसेस में आपके नर्वस सिस्टम को भी चोट पहुंचा सकता है हालत इतनी गंभीर है और यह सारी खबरें हमें सिर्फ इसलिए पता चल पा रही है क्योंकि दूसरे देशों की अथॉरिटीज अपना काम कर रही हैं नहीं तो अपने देश में ना तो टीवी चैनलों में इसे दिखाया जा रहा है और ना ही सरकार की तरफ से कोई चेतावनी आई अरे चेतावनी देना तो छोड़ो मोदी सर सकार ने पिछले महीने पेस्टिसाइड की लिमिट को 10 गुना बढ़ा दिया जितना पेस्टिसाइड आपके मसालों में पाया जाना एक्सेप्टेबल है उसे 10 गुना बढ़ा दिया गया है 140 करोड़ लोगों की जिंदगियों के साथ यहां खेल खेला जा रहा है यहां बात सिर्फ कुछ मसालों की नहीं है यह खेल इससे कहीं ज्यादा खतरनाक है आइए समझते हैं इस वीडियो में गहराई से कि ये कौन से केमिकल्स हैं जो पाए जा रहे हैं क्यों पाए जा रहे हैं क्या इसके पीछे असली कारण है और आप अपनी सेहत को बचाने के लिए यहां पर क्या कर सकते हैं] वीडियो शुरू करने से पहले यहां एक चीज मैं साफ कर दूं इससे पहले कि कुछ लोग रोए कि बार-बार सरकार को क्यों बीच में लाते हो हमारे पापा की इसमें क्या गलती है यहां पर इस बात में कोई दो राय नहीं है कि सारी जिम्मेदारी सरकार के ऊपर है एवरेस्ट कंपनी से जब पूछा गया कि उनके मसाले ऐसे क्यों निकल रहे हैं तो उन्होंने क्या जवाब दिया कि हमें तो नेसेसरी क्लीयरेंसस और अप्रूवल स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया ने ही दिया था स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया क्या है इंडियन गवर्नमेंट की रेगुलेटरी अथॉरिटी है जो कि आती है मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अंडर इसके अलावा हमारे खाने में कैंसरस केमिकल्स हैं या नहीं यह जांच करने की जिम्मेदारी है एफएसएसएआई की फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया जो कि आती है मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के अंडर और ये सिर्फ हमारे देश की बात नहीं है दूसरे देशों के फूड अथॉरिटीज भी उनकी सरकारों के अंडर आते हैं और वो सारे देश कम से कम अपने देशवासियों की हेल्थ की परवाह तो कर रहे हैं कम से कम यह तो कह रहे हैं कि आपका खाना खतरनाक है इन मसालों से दूर रहो हमारी सरकार के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकला है एफएसएसए की तरफ से इकलौता रिस्पांस ये आया है कि हमें 20 दिन चाहिए इन मसालों की टेस्टिंग कराने के लिए फिर हम देखेंगे कि ये हानिकारक है या नहीं इन्हें 20 दिन चाहिए यहां पर एक आम आदमी ने अपनी तरफ से टेस्टिंग करा ली और कुछ ही दिनों के अंदर टेस्ट रिजल्ट्स आ भी गए और एफएसएआई वो यूनिट है जिन्होंने 20 दिन मांगे यह जवाब देने के लिए कि इसके अंदर इथाइल ऑक्साइड प्रेजेंट है या नहीं है मेरा सवाल एफएसएआई से यह है कि अगर मैं 4 दिन के अंदर पता लगा सकता हूं कि इसके अंदर कितना इथाइन ऑक्साइड है तो आपको 20 दिन का टाइम क्यों चाहिए इस रिपोर्ट को देखिए एक के फिश करी मसाले को टेस्टिंग करने के लिए भेजेगा उसने इसे फूड हाइजीन एंड हेल्थ लेबोरेटरी में भेजा 23 अप्रैल को उसने 50 ग्रा मसाले का सैंपल भेजा और 26 अप्रैल को रिपोर्ट तैयार भी होकर आ गई क्या पाया गया इस मसाले में इथाइन ऑक्साइड की मात्रा 7.57 मग्र पर किलोग्राम की कंसंट्रेशन में मौजूद है इसकी लिमिट है 0.1 मिग्रा पर किग्रा यानी कि ये लिमिट से 70 गुना ज्यादा मात्रा में कैंसर कॉजिंग केमिकल मौजूद था अब कुछ लोग बहाने मारते हैं कि दुनिया भर के देशों की ये साजिश है मोदी सरकार को गिराने की इलेक्शन के पहले ही ऐसी खबरें क्यों आती हैं यह खबरें इलेक्शन के पहले नहीं आ रही यह काफी टाइम पहले से आई जा रही है टीवी चैनल बस आपको दिखा नहीं रहे अक्टूबर 2022 और सितंबर 2023 के बीच में अमेरिका ने 15 पर एमडीएच के प्रोडक्ट्स को रिजेक्ट किया था 2020 से लेकर आज तक जैसा मैंने बताया यूरोपियन यूनियन 527 इंडियन प्रोडक्ट्स को रिजेक्ट कर चुका है या बैन कर चुका है और अगर उन देशों पर यकीन नहीं होता तो इस रिपोर्ट को ही देख लो यह तो एक इंडियन ने ही करवाई है एक इंडियन लेबोरेटरी में ही इस इशू की सीरी नेस को समझ गए हो तो आइए अब थोड़ा इस केमिकल इथाइन ऑक्साइड के बारे में जानते हैं इसका शॉर्ट फॉर्म है ओ या ईटीओ ये एक फॉसिल फ्यूल का बायप्रोडक्ट है जिसके इंडस्ट्रियल यूजेस बहुत सारे हैं लेकिन जो यूज हमारे केस में रिलेवेंट है वो है स्पाइसेसफर शब्द का मतलब होता है डिस इफेक्ट करना या स्टेरलाइज करना जितने हानिकारक कीटाणु और बैक्टीरिया होते हैं खाने में उन्हें मारना इथाइन ऑक्साइड का एक गैस के फॉर्म में इस्तेमाल किया जाता है ये गैस किसी भी मटेरियल की पैकेजिंग के थ्रू बड़ी आसानी से फ्लो कर जाती है और काफी आसान और एफिशिएंट तरीके से इसका इस्तेमाल किया जा सकता है डिस इफेक्ट करने के लिए ये गैस अपने आप में कलरलेस है तो आपको दिखेगी नहीं लेकिन फ्लेमेबल जरूर है ये यानी कि आग लग सकती है इस पर इससे ईकोलाई और साल्मोनेला जैसे हार्मफुल बैक्टीरियस को मारा जा सकता है साथ ही साथ फंगस के खिलाफ भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है इंटरेस्टिंग चीज ये है कि फसल उगाते समय इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि मसालों की पैकेजिंग करते समय इसका इस्तेमाल किया जाता है तो अगर मसालों में इथाइन ऑक्साइड की बहुत ज्यादा मात्रा पाई जाती है तो उस किसान की गलती नहीं है जो फसल को उगा रहा है बल्कि उस कंपनी की जिम्मेदारी है जो पोस्ट हार्वेस्ट ट्रीटमेंट के दौरान और पैकेजिंग करने से पहले इथाइन ऑक्साइड का इस्तेमाल कर रही है प्रॉब्लम स्टोरेज के वक्त आ रही है ये एक बड़ा सिंपल सा फ्लो चार्ट आप देख सकते हैं स्क्रीन पर जो अलग-अलग प्रोसेसेस बताता है जो इवॉल्वड हैं इथाइन ऑक्साइड की स्टेरलाइजेशन के दौरान सबसे पहले प्री कंडीशनिंग होती है ह्यूमिडिटी टेंपरेचर प्रेशर कंट्रोल चेक किया जाता है फिर इस गैस के द्वारा स्टेरिन किया जाता है और फिर उस गैस की इवेक्युएशन और गैस वाशिंग करी जाती है ये जो तीसरा प्रोसेस है इसका नाम है एरिए और ये बहुत-बहुत जरूरी प्रोसेस है क्योंकि यहां पर इस केमिकल को वापस से बाहर निकालने का काम किया जाता है नाइट्रोजन इंजेक्शंस और वैक्यूम डीगैसिंग का इस्तेमाल किया जाता है इस केमिकल को खत्म करने के लिए ये बहुत इंपॉर्टेंट इसलिए है क्योंकि इसी स्टेप पर प्रॉब्लम आती है अगर खाने की स्टेरिन कर ली ईटीओ से लेकिन उसके बाद इसकी रिएशन ढंग से नहीं करी गई तो केमिकल की कुछ ट्रेसेस खाने में बच जाएंगे इससे कुछ और हानिकारक केमिकल कंपाउंड्स की फॉर्मेशन होगी जैसे कि टू क्लोरो इथेनॉल या इथाइन क्लोरोहाइड्रेट ये वही हानिकारक केमिकल्स हैं वैसे जो कफ सिरप्स में भी पाए गए थे इसकी बात मैंने फार्मा फाइल्स वाले वीडियो में करी थी वही कफ सिरप्स जिनकी वजह से बच्चों की मौत हो गई थी उज्बेकिस्तान में और यही कारण है कि इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर इथाइन ऑक्साइड को ग्रुप वन कार्सिनोजेन की कैटेगरी में डालती है इन्होंने चार अलग-अलग ग्रुप्स बना रखे हैं क्लासिफिकेशन के ग्रुप वन में वो चीजें हैं जिनसे फॉर शोर इंसानों को कैंसर होता है ग्रुप टू ए में वो चीजें हैं जिनसे प्रोबेबली कैंसर होता है इंसानों को ग्रुप टू बी में वो चीजें हैं जिनसे पॉसिबली हो सकता है कैंसर इंसानों को और ग्रुप थ्री वाली चीजें नॉन क्लासिफाई बल है तो ग्रुप वन वाली चीजें सबसे ज्यादा खतरनाक है एक ये लिस्ट देख सकते हो अलग-अलग केमिकल्स की जो ग्रुप वन में आते हैं कई सारी चीजें आती हैं इसमें जैसे कि कोयला टोबैको एलुमिनियम की प्रोडक्शन डीजल इंजन का एग्जॉस्ट और इनमें से एक एंट्री यहां पर इथाइन ऑक्साइड की भी है इसके बारे में तो यह तक कहा गया है कि इवन लो लेवल्स पर इथाइन ऑक्साइड से लिंफाइड कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है अगर आप इस गैस को इन्हेल करते हो इससे सेल्यूलर मटेरियल में आपके परमानेंट म्यूटेशंस हो सकती हैं जो कि आपकी आने वाली पीढ़ियों में भी पास ऑन करी जा सकती हैं यही कारण है कि यूरोपियन यूनियन की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है इथाइन ऑक्साइड को लेकर ना सिर्फ इन्होंने अपने सारे यूरोपियन देशों में कंप्लीट बैन कर दिया इथाइन ऑक्साइड को बल्कि ये भी कहा कि इंपोर्टेड चीजों में भी इथाइन ऑक्साइड बैंड है इस पॉलिसी में एक थोड़ा सा बदलाव आया था साल 2003 में जब इन्होंने देखा कि इंपोर्टेड खाने में माइक्रोबिट कंटेम मेशन का रिस्क काफी ज्यादा है तो इसको मध्य नजर रखते हुए उन्होंने कहा कि ठीक है इंपोर्टेड खाने में हम बहुत थोड़ी सी मात्रा का एथलीन ऑक्साइड अलाव करेंगे इन्होंने एक मैक्सिमम रेसिड्यू लिमिट डिफाइन करी 0.2 मिग्रा पर किग्रा की मतलब ईटीओ का इतना सा रेसिड्यू रह गया तो चलता है लेकिन इससे ज्यादा अलाउड नहीं है लेकिन इस लिमिट को भी 2022 में यूरोपियन कमीशन ने और भी कम कर दिया इन्होंने कहा 0.2 भी नहीं 0.1 मिग्रा पर किग्रा नई लिमिट होगी तो आज के दिन ईटीओ की इतनी एक्सेप्टेबल लिमिट है यूरोप में और वो भी सिर्फ इंपोर्ट किए जाने वाली चीजों में जो चीजें यूरोप के अंदर बन रही हैं उनमें कंप्लीट बैंड है ईटीओ का इस्तेमाल पिछले साल अप्रैल 2023 में इन्होंने ईटीओ की क्लासिफिकेशन भी बदल दी इन्होंने कहा हम इसे फ्यूम गेंट्स इड रेसिड्यू बुलाएंगे इस डेफिनेशन को बदलने का मतलब था कि हर एक यूरोपियन देश के लिए यह मैंडेटरी बन गया वो अपने फूड सैंपल्स की टेस्टिंग कराए ईटीओ को लेकर सिंगापुर की बात करी जाए सिंगापुर की जो मैक्सिमम अलाउड लिमिट है थालियम ऑक्साइड की वो यूरोप से कहीं ज्यादा है 50 मिग्रा पर किग्रा इनके देश में फ्यूम केशन के तौर पर ईटीओ का इस्तेमाल करना अलाउड है लेकिन जो लिमिट है इनकी 500 गुना ज्यादा है ये यूरोप की लिमिट से और फिर भी जब इन्होंने एवरेस्ट के फिश करी मसाला की टेस्टिंग करी तो अपनी लिमिट से ज्यादा इन्होंने ये केमिकल पाया हांगकांग की बात करें तो इस मामले में हांगकांग की रेगुलेशन ज्यादा मजबूत है सिंगापुर से ये ना सिर्फ ईटीओ को एक पेस्टिसाइड कंसीडर करते हैं बल्कि इनके देश में इसे फ्यूम केशन के तौर पर इस्तेमाल करना अलाउड ही नहीं है और ना ही इसे पेस्टिसाइड के तौर पर इस्तेमाल करना अलाउड है अगर हांगकांग में फूड क्वालिटी को लेकर वायलेशन होती है तो $50000 का फाइन लग सकता है और 6 महीने की जेल हो सकती है यह सब सुनकर अगर आप टेंशन में आ रहे हो और आपको लग रहा है कि यार भगवान जाने क्या-क्या डला है हमारे खाने में कौन-कौन से हानिकारक केमिकल्स हैं तो चिंता मत करो चैट जीपीटी जैसा एआई टूल यहां पर आपकी बहुत मदद कर सकता है किसी भी खाने के आइटम की इंग्रेडिएंट्स देखो पीछे और किसी भी इंग्रेडिएंट्स पोटैशियम ब्रोमेट ये कई ब्रेड्स में इस्तेमाल किया जाता है सीधा पूछो इज पोटैशियम ब्रोमेट बैड फॉर हेल्थ एंड इज इट बैंड इन एनी कंट्री आपको जवाब मिल जाएगा क्लियर कि इसे यूरोप और कनाडा जैसे देशों में बैन किया गया है लेकिन अमेरिका में ये अभी भी अलाउड है और ये हानिकारक है हेल्थ के लिए एक-एक इंग्रेडिएंट्स इंग्रेडिएंट्स की फोटो खींच के भी आप डाल सकते हो और पूछो चैट जीपीटी से इतने सारे जो इंग्रेडिएंट्स यहां पर डले हैं इनमें से कोई भी मेरी हेल्थ के लिए हानिकारक है क्या बहुत अच्छा ब्रेकडाउन यहां पर आपको मिल जाएगा जैसा आप स्क्रीन पर देख सकते हैं चैट जीपीटी डेली लाइफ में ऐसी चीजों के लिए बहुत यूजफुल है नॉर्मली ऐसी चीजों को अगर आप google3 अकेडमी पर मैंने एक पूरा 52 घंटे का कोर्स बना रखा है मास्टर चैट जीपीटी के ऊपर आप अपनी पढ़ाई में अपने काम में अपनी डेली लाइफ में चीजों को 10 गुना ज्यादा स्पीड से कर सकते हैं इसकी मदद से इस कोर्स में मैं रेगुलर अपडेट्स भी डालता हूं नेक्स्ट अपडेट जून 2024 में आएगा अगर आपने अभी तक जवाइन नहीं किया है तो नीचे जाकर डिस्क्रिप्शन में इसका लिंक मिल जाएगा या फिर इस क्यूआर कोड को भी स्कैन कर सकते हैं कूपन कोड इस्तेमाल कीजिए फूड 40 40 पर ऑफ पाने के लिए एक और चीज कहना चाहूंगा आप में से जिन लोगों को चैट जीपीटी का सब्सक्रिप्शन खरीदना महंगा लगता है इस ऐप को ट्राई करके देखिए गनी a वही सेम फीचर्स और परफॉर्मेंस चट जीपीटी वाली लेकिन चैट जीपीटी से ये आधी से कम कॉस्ट पर अवेलेबल है इसमें तो डायरेक्टली फोटो चैट और पीडीएफ चैट अवेलेबल है आप इंग्रेडिएंट्स की फोटो खींच कर इससे भी आप पूछ सकते हैं सेम जवाब मिलेगा लिंक डिस्क्रिप्शन में है अब टॉपिक पर वापस आते हैं इतना सब हो जाने के बावजूद एवरेस्ट के जो डायरेक्टर हैं राजीव शाह वो कहते हैं कि 60 में से सिर्फ एक फिश करी मसाला में ही तो ईटीओ निकला है तो बाकी सारे मसाले खाने लायक हैं और दूसरी तरफ एमडीएच का भी यही दावा है कि सारे प्रोडक्ट्स इनके सेफ हैं और आराम से खाने लायक हैं लेकिन पता है क्या दोस्तों बात यहां पर सिर्फ इथाइन ऑक्साइड की नहीं है जैसा मैंने वीडियो के शुरू में बताया था अमेरिका में जो एमडीएच मसालों की शिपमेंट्स को रिजेक्ट किया किया गया वो साल्मोनेला की वजह से किया गया आयरन की बात देखो यहां पर क्या है मैंने आपको बताया था टीयू का इस्तेमाल किया जाता है साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया को मारने के लिए तो यहां कुछ मसालों में ईटीओ पाया जा रहा है कुछ मसालों में साल्मोनेला पाया जा रहा है यूएस की एफडीए ने बताया कि अक्टूबर 2022 और सितंबर 2023 के बीच में 15 पर एमडीएच के जो मसाले इंपोर्ट किए जा रहे थे अमेरिका में उन्हें रिफ्यूज कर दिया गया साल्मोनेला की वजह से लेकिन इसके अगले पीरियड में अक्टूबर 2023 से लेकर जो अभी तक का समय है यह रिजेक्शन का रेट 31 पर पर था टोटल में 11 शिपमेंट्स को रिजेक्ट किया गया जिनमें स्पाइसे फ्लेवर्स और सल्ट्स थे एमडीएच के और एक शिपमेंट का मतलब यहां पर एक प्रोडक्ट नहीं है एक शिपमेंट यहां पर एक कार्टन भी हो सकता है एक ट्रक लोड भी हो सकता है और एक पूरे जहाज का कंटेनर भी हो सकता है इस आउटलुक के आर्टिकल के अनुसार जनवरी 2022 में यूएस के एफडीए ने एमडीएच के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का फिजिकल इंस्पेक्शन भी किया था इंडिया में आकर उस वक्त खतरा इतना ज्यादा नहीं था लेकिन तब भी एफडीए ने ये नोट किया था कि प्लांट में एडिक्ट सैनिटरी फैसिलिटी और अकोमोडेशंस नहीं है एज कोड सुनिए इक्विपमेंट और यूटेंसिल्स इनके इस तरीके से डिजाइन ही नहीं किए गए कि उन्हें क्लीन किया जा सके मेंटेन किया जा सके कंटेम के अगेंस्ट प्रोटेक्ट किया जा सके बात यहां सिर्फ एमडीएच के मसालों की नहीं है फाइनेंशियल ईयर 2020 और 2023 के बीच में अमेरिका ने 786 शिपमेंट्स को रिजेक्ट किया जो इंडिया से आ रही थी टोटल में 3925 ह्यूमन फूड एक्सपोर्ट की शिपमेंट्स इंडिया से यूएस भेजी गई थी यानी कि 20 पर रिजेक्ट हो गई साल्मोनेला की वजह से इसमें सिर्फ मसाले ही नहीं थ थे इसमें विटामिंस मिनरल्स प्रोटींस बेकरी प्रोडक्ट सी फूड प्रोडक्ट्स भी थे हेडलाइन पढ़ो इस आर्टिकल की क्या है इंडिया से जो आने वाला सामान है उसका रिजेक्ट होने का चांस सात गुना ज्यादा है चाइना से आने वाले सामान के कंपैरिजन में हमारे देश के स्टैंडर्ड्स को इतना गिरा दिया गया है और बात यहां सिर्फ इथाइन ऑक्साइड और सालमोनेला तक सीमित नहीं रहती पिछले साल की इस खबर को भी देखो 14 नवंबर 2023 यूरोपियन कमीशन ने अलार्म साउंड किया इंडिया से आने वाले टर्मरिक को लेकर जहां पर एक खतरनाक जानलेवा पेस्टिसाइड क्लो पाय रीफोर्स पाया गया यह पेस्टिसाइड कई देशों में बैंड है क्योंकि इससे बच्चों की ब्रेन ग्रोथ पर फर्क पड़ता है इसलिए मैं कह रहा हूं कि ये प्रॉब्लम कुछ मसालों से कहीं ज्यादा बढ़कर है और ये चीजें पिछले कई सालों से देखी जा रही हैं यूरोप में चेतावनी की घंटी साल 2020 में बेल्जियम के द्वारा बजाई गई थी जब भारतीय सेसमी सीड्स यानी तिल में इथाइन ऑक्साइड पाया गया था तब से लेकर आज तक ये इतनी सारी चीजों में पाया जा चुका है सीरियल्स चॉकलेट्स बिस्किट्स ब्रेड क्रैकर स्पाइसेज और तो और खेतों में जो जानवरों को खाना खिलाया जाता है उसमें भी यह पाया गया इस बेल्जियम वाले इंसीडेंट के बाद ही था कि यूरोपियन फूड सेफ्टी एजेंसी ने इंडियन इंपोर्टेड खाने को सीरियसली लेना शुरू किया इनका एक ये इंफॉर्मेशन नेटवर्क है यूरोपियन रैपिड अलर्ट सिस्टम फॉर फूड एंड फीड जिसका शॉर्ट फॉर्म है आर एसएफएफ इनका जो डाटा होता है यह पब्लिकली अवेलेबल है तो आप खुद भी जाकर चेक कर सकते हो इनकी वेबसाइट पर मार्च 2019 और मार्च 2024 के बीच में इंडियन इंपोर्टेड चीजों को लेकर 985 आरएएस एफएफ की नोटिफिकेशंस आई हैं जिन्हें सीरियस कैटेगरी में डाला गया है यह कोई नेक्सस नहीं है यह सिर्फ एक ऐसी व्यवस्था है जो यूरोप ने अपने देश के नागरिकों की सेफ्टी के लिए बनाई है इनकी कोशिश है कि लोगों को पता चले कि एगजैक्टली किस खाने में क्या-क्या पाया जा रहा है इस वेबसाइट का लिंक मैंने डिस्क्रिप्शन में नीचे डाल दिया है आप जाकर खुद देख सकते हैं और स्क्रीन पर इसके कुछ एग्जांपल्स देखिए मई 2022 और अप्रैल 2022 की नोटिफिकेशंस क्यूमिन और फेन ग्रीक में क्लोर पायरी फोस पेस्टिसाइड पाया गया फिनलैंड में बॉर्डर पे ही इसे रिजेक्ट कर दिया गया नेदर जैंड्स में इसका अलर्ट आया दोनों को सीरियस क्लासिफिकेशन में डाला है आप इनकी वेबसाइट का सर्च सिस्टम भी इस्तेमाल कर सकते हैं अलग-अलग प्रोडक्ट्स को देखने के लिए जैसे कि एला टॉक्सिंस पाए गए पीनट बटर ग्राउंड नट्स चावल में जो इंडिया से आ रहे थे सलम लेना पाया गया सेसमी सीड्स अनियन पाउडर बीटल लीव्स में जो इंडिया से आ रहे थे मरक्यूरी और लेड जैसे हानिकारक केमिकल्स पाए गए आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स में जो इंडिया से इंपोर्ट किए जा रहे थे एक-एक नोटिफिकेशन पे आप डिटेल्स में जाकर नीचे स्क्रॉल करके भी देख सकते हैं कि एगजैक्टली कितना मरकरी कितना लेड पाया गया ऐसे प्रोडक्ट्स को लेकर थैंकफूली हमारे देश में जुडिशरी है जो अभी भी कुछ कुछ हद तक इंडिपेंडेंटली काम कर पा रही है इन्हें लपेटे में लिया इन्होंने अभी आपने रिसेंट खबर में देखा होगा वरना हमारी जो हेल्थ मिनिस्ट्री थी और एफएसएसएआई जो है इन्होंने तो खुली छूट दे रखी है जैसे मर्जी झूठे प्रचार करते रहो याद है 2015 में दोस्तों हमारी सरकार ने मैगी को बैन कर दिया था क्योंकि उसमें एमएसजी के ट्रेसेस पाए गए थे इसके एकदम बाद पतंजलि नूडल्स को लॉन्च किया पूरे देश भर में बड़ी लॉन्च हुई लेकिन अब जब पूरी दुनिया में देश के इतने सारे प्रोडक्ट्स पर बैन लगाया जा रहा है तो हमारी सरकार कुछ नहीं कह रही सोच सकते हो इतने सारे केमिकल्स इतने सारे पेस्टिसाइड्स जिनको लेकर ये एफएसएसएआई वाले अभी तक इतनी सारी खबरें आने के बावजूद भी कोई चेतावनी नहीं दे रहे देश में हालत सही में बहुत खराब है और बहुत गंभीर है एक स्टडी करी गई थी पेस्टिसाइड्स एक्शन नेटवर्क इंडिया के द्वारा इन्होंने पाया कि 275 पेस्टिसाइड जो इंडिया में इस्तेमाल किए जाते हैं उनमें से 255 टॉक्सिक पॉयजंस हैं और 56 कार्सिनोजेनिक है ये 2017 में स्टडी करी गई थी आज के दिन 292 पेस्टिसाइड्स इस्तेमाल किए जा रहे हैं देश में बच्चे स्पेशली सबसे ज्यादा वल्नरेबल है क्योंकि बच्चों की ब्रेन ग्रोथ और डेवलपमेंट पर इसका असर पड़ता है अब कुछ लोग सोचेंगे कि ऑर्गेनिक खाना यहां पर एक सॉल्यूशन हो सकता है जो कि मेरी राय में डेफिनेटली बेटर ऑप्शन है लेकिन ऑर्गेनिक खाने में भी दो प्रॉब्लम्स आती हैं पहला तो यह कि कितने लोग उस टाइप के खाने को अफोर्ड कर सकते हैं और दूसरी प्रॉब्लम इंडिया का जो ऑर्गेनिक खाना है वो भी एक रिस्क बताया जा रहा है अमेरिका और यूरोप के द्वारा 11 जनवरी 2021 अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर ने इंडिया की एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी के साथ अपनी एग्रीमेंट खत्म कर दी इस एग्रीमेंट के तहत इंडिया के बिजनेसेस इंडिया में बनने वाले ऑर्गेनिक खाने को यूएसडीए का ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन दे सकते थे लेकिन अमेरिका इस एग्रीमेंट से पीछे हट गया यह कहकर कि इंडिया का जो ऑर्गेनिक कंट्रोल सिस्टम है वो इंसफिशिएंट है वो हमारे स्टैंडर्ड्स मीट नहीं कर रहा और इसलिए हमारा लेबल ऑर्गेनिक का वो लोग इस्तेमाल करें हमारे लेबल की जो रेपुटेशन है वो नीचे गिर जाएगी यूरोप में मार्च 204 में पब्लिश हुई इस साइंटिफिक रिपोर्ट को देखिए इसे यूरोपियन यूनियन के ईएएसए ने पब्लिश किया है इसमें में लिखा है इंडिया से आने वाले ऑर्गेनिक ड्राई बींस राइस और क्यूमन सीड्स जैसे खाने में क्लोर पायरी फॉस पेस्टिसाइड पाया गया यानी आप ऑर्गेनिक खाना खाओगे तो भी कोई गारंटी नहीं है कि उसमें पेस्टिसाइड नहीं मिलेंगे हालांकि फिर भी मैं कहूंगा ये एक बेटर चॉइस है अगर आप अफोर्ड कर सकते हो तो अब इतना कुछ हो जाने के बावजूद सबसे बेशर्मी वाली चीज जो मोदी सरकार ने करी वो थी ये 8 अप्रैल 2024 को एफएसएसएआई के द्वारा एक नोटिफिकेशन आती है इसमें लिखा जाता है कि पेस्टिसाइड्स की एमआरएल यानी कि मैक्सिमम रेसिड्यू लिमिट बढ़ा दी जाएगी कोई छोटे-मोटे नंबर से नहीं बल्कि 10 गुना ज्यादा 10 गुना ज्यादा बढ़ा दी सरकार ने पेस्टिसाइड की लिमिट पहले 0.01 मिग्रा पर किलोग्राम पेस्टिसाइड एक्सेप्टेबल था खाने में अब इन्होंने कहा 0.1 मिग्रा पर किलोग्राम पेस्टिसाइड एक्सेप्टेबल है एफएसएसएआई ने इस नोटिफिकेशन में बताया कि ये फिगर्स प्रॉपर फील्ड ट्रायल्स के बाद सेट किए गए हैं लेकिन पेस्टिसाइड एक्शन नेटवर्क इंडिया ने इस मैंडेट को लेकर ऑब्जेक्शन रेज किया इन्होंने कहा कि सीआईबस तो फील्ड ट्रायल्स कंडक्ट ही नहीं करता पेस्टिसाइड्स के जितना भी डाटा है वो सारी मैन्युफैक्चरिंग कंपनीज के द्वारा प्रोवाइड किया जाता है और सीआईबस तो सिर्फ अप्रूव करता है पेस्टिसाइड्स को उस डाटा के आधार पर जब लोगों ने इस खबर को लेकर सोशल मीडिया पर हल्ला मचाना शुरू किया कि ये क्या हो रहा है तो एफएसएसएआई ने अपने आप को डिफेंड करने के लिए कहना शुरू कर दिया ये तो झूठी खबर है हमें बदनाम करने की कोशिश करी जा रही है इस न्यूज़ आर्टिकल को देखिए एफएसएसएआई कह रहा है कि ये रिपोर्ट जो है कि हमने 10 गुना लिमिट बढ़ा दी है यह फॉल्स और मेलिश अस रिपोर्ट्स हैं इंडिया के तो सबसे स्ट्रिक्ट स्टैंडर्ड्स हैं अच्छा भाई क्या गलत खबर फैलाई जा जरा देखें क्या इनका डि

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