ओटावा। अमेरिका से विवाद में उलझे कनाडा में शुक्रवार को पूर्व बैंकर मार्क कार्नी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलवाई गई। उन्होंने ब्रिटेन के किंग चार्ल्स के प्रति वफादारी की शपथ ली। कनाडा में अभी भी ब्रिटेन के राजा का शासन है और राजा ही कनाडा में गवर्नर जनरल की नियुक्ति करते हैं। कार्नी ने अपने जन्मदिन (16 मार्च 1965) के महज दो दिन पहले प्रधानमंत्री पद संभाला है। उन्होंने भारत के साथ संबंधों को सहज व सरल बनाने का विश्वास दिलाया है।
ट्रूडो ने लगभग एक दशक तक सत्ता में रहने के बाद शुक्रवार को पद छोड़ दिया उसके बाद कार्नी को 24वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। कार्नी इससे पहले कभी राजनीति में नहीं रहे। ट्रूडो ने जनवरी में अपने इस्तीफे की घोषणा की थी क्योंकि सर्वेक्षणों से पता चला था कि उनकी लिबरल पार्टी को आगामी चुनाव में हार का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन ट्रम्प और उनकी नीतियों के प्रति कनाडा में बढ़ती नाराजगी के बीच पार्टी की किस्मत में सुधार हुआ है। कार्नी संसद में सीट लिए बिना कनाडा के प्रधानमंत्री बनने की असामान्य स्थिति में हैं।
शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट किए गए विदाई संदेश में ट्रूडो ने कहा: “धन्यवाद, कनाडा – मुझ पर भरोसा करने के लिए, मुझे चुनौती देने के लिए, और मुझे पृथ्वी पर सर्वश्रेष्ठ देश और सर्वश्रेष्ठ लोगों की सेवा करने का विशेषाधिकार देने के लिए।”
बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड के पूर्व गवर्नर कार्नी को 9 मार्च को भारी बहुमत से लिबरल पार्टी का नेता चुना गया था। वित्तीय क्षेत्र में अपने दशकों लंबे करियर के दौरान, कार्नी ने प्रमुख वैश्विक संकटों और उथल-पुथल के दौर में सरकारों का मार्गदर्शन किया है – उनके इस अनुभव का लाभ अब ट्रूडो से पदभार ग्रहण करने के बाद देश को मिलने की उम्मीद है।
लिबरल्स एक दशक से भी ज़्यादा समय से कार्नी को लुभाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कोविड-19 से कनाडा की आर्थिक रिकवरी पर ट्रूडो को सलाह दी थी। लेकिन बैंकर से राजनेता बने इस व्यक्ति ने तब तक आधिकारिक रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई जब तक कि ट्रूडो ने जनवरी में अपने इस्तीफ़े की घोषणा नहीं कर दी। उनके सभी प्रतिद्वंद्वी मौजूदा राजनेता थे।
कार्नी के नए मंत्रिमंडल में क्रिस्टिया फ्रीलैंड परिवहन मंत्री बनेंगी। पिछली सरकार में वे वित्त मंत्री थीं और पार्टी के नेता पद के लिए उन्होंने कार्नी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। विपक्ष ने कहा कि ट्रुडो सरकार के 87 प्रतिशत मंत्री नई सरकार में भी हैं।











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