सम्राट विक्रमादित्य और मोदी में समानता हैः डॉ.मोहन यादव

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्राट विक्रमादित्य और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में अनेक समानताएं बताई हैं। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने शून्य प्रतिशत ब्याज पर राशि देकर व्यापार-व्यवसाय को प्रोत्साहित किया और हर व्यक्ति के लिए आशियाने की बात कही। प्रधानमंत्री मोदी ने भी शहरी हो या गरीब सभी के लिए पक्के मकान की व्यवस्था के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। उनके द्वारा बिना ब्याज के धन राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। शिक्षा, न्यायप्रियता प्रत्येक क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाने के लिए सम्राट विक्रमादित्य का काल और आज के इस काल में अनेकों समानताएं हैं।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रमोत्सव के संबंध में नई दिल्ली में मीडिया के लिए शनिवार को जारी संदेश में ये विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारतीय ज्ञान परम्परा से “विरासत से विकास’’ के ध्येय को देश में साकार कर रहे हैं। भगवान श्रीराम के बाद सम्राट विक्रमादित्य का शासन ही सुशासन की मिसाल स्थापित करता है। आगामी 12-13 और 14 अप्रैल को नई दिल्ली में सम्राट विक्रमादित्य पर केन्द्रित भव्य आयोजन होने जा रहा है। मुख्यंत्री ने इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को आमंत्रित किया है।
डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सहित देश के विभिन्न भागों में विक्रमोत्सव अंतर्गत हो रहे कार्यक्रम सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विभिन्न पहलुओं और उनकी शासन व्यवस्था से जन-जन को प्रेरित कराने का एक अभूतपूर्व प्रयास है।

32 मंत्री और सिंहासन बत्तीसी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि न्यायप्रियता, ज्ञानशीलता, धैर्य, पराक्रम, परुषार्थ, वीरता और गंभीरता जैसी विशेषताओं के लिए सम्राट विक्रमादित्य का संपूर्ण भारत के साथ ही विश्व में आदर के साथ स्मरण किया जाता है। सम्राट विक्रमादित्य द्वारा विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर 2082 वर्ष पहले विक्रम संवत का प्रवर्तन किया गया था। उन्होंने सुशासन के सभी सूत्रों को स्थापित करते हुए अपने सुयोग्य 32 मंत्रियों का चयन किया, इसीलिए उनके सिंहासन को “सिंहासन बत्तीसी’’ कहा जाता है।

सम्राट विक्रमादित्य ने गणराज्य की स्थापना कर लोकतांत्रिक व्यवस्था का क्रियान्वयन आरंभ किया। साथ ही जनता के लिए जवाबदेह नवरत्नों का मंत्री-मंडल गठित कर ऐसी व्यवस्था की जिसमें राजा नहीं बल्कि नौ मंत्रियों द्वारा लिए गए निर्णयों का शासन द्वारा क्रियान्वयन किया जाता था। सुशासन के लिए वर्तमान में क्रियान्वित मापदंड सम्राट विक्रमादित्य के काल की याद दिलाते हैं।

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