प्रतीक स्मिता पाटिल ने पिता राज बब्बर को शादी में न बुलाने का किया खुलासा, कहा – अब परिस्थितियां अलग हैं

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बॉलीवुड अभिनेता प्रतीक स्मिता पाटिल ने हाल ही में अपने पिता और वरिष्ठ अभिनेता-राजनेता राज बब्बर को अपनी शादी में न बुलाने का कारण बताया। प्रतीक ने कहा कि उनकी शादी माता स्मिता पाटिल के घर पर हुई थी, और उस घर में उनके पिता और उनकी दूसरी पत्नी नदीरा बब्बर को आमंत्रित करना उचित नहीं होता, क्योंकि उनकी माता और नदीरा के बीच पुराने मतभेद थे।

प्रतीक स्मिता पाटिल ने प्रिया बनर्जी से इस साल फरवरी में शादी की थी, और इस समारोह में उनके पिता राज बब्बर, सौतेले भाई आर्य बब्बर और बहन जूही बब्बर अनुपस्थित थे। इस अनुपस्थिति ने काफी चर्चा बटोरी थी।

शादी में पिता को न बुलाने का कारण
प्रतीक ने एक इंटरव्यू में बताया, “मेरे पिता की पत्नी और मेरी माँ के बीच कुछ परेशानियाँ थीं, जो 38-40 साल पहले मीडिया में भी आई थीं। मैं अपने पिता और उनके परिवार के साथ किसी और समारोह में शामिल होने के लिए तैयार था, लेकिन उस घर में नहीं, जहां मेरी माँ और उनके बीच इतना कुछ हुआ था।”

प्रतीक ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उनके पिता के साथ किसी व्यक्तिगत मतभेद के कारण नहीं था, बल्कि उनकी माँ की इच्छाओं का सम्मान करने के लिए था। उन्होंने कहा, “मैं अपने पिता और उनकी पत्नी से माफी मांगता हूँ कि वे हमारे साथ नहीं हो सकते थे, खासकर उस घर में, जिसे मेरी माँ ने मेरे लिए खरीदा था।”

परिवार के बीच के मतभेद
राज बब्बर ने नदीरा बब्बर से 1975 में शादी की थी, और उनके दो बच्चे आर्य बब्बर और जूही बब्बर हैं। बाद में उन्होंने स्मिता पाटिल से विवाह किया, और उनके एक बेटा प्रतीक हुआ। हालांकि, स्मिता पाटिल का प्रतीक को जन्म देने के बाद निधन हो गया था। इसके बाद राज बब्बर नदीरा के पास वापस चले गए ।

प्रतीक का नाम बदलने का निर्णय
प्रतीक ने हाल ही में अपना नाम प्रतीक बब्बर से बदलकर प्रतीक स्मिता पाटिल कर लिया है। उन्होंने कहा, “मुझे अपने नाम के साथ अपनी माँ की विरासत को संजोने में अच्छा लगता है। मैं अपनी माँ की तरह बनना चाहता हूँ, न कि अपने पिता की तरह।”

प्रतीक का यह निर्णय उनके पिता और उनके परिवार के साथ उनके रिश्तों को लेकर कई चर्चाएँ शुरू कर दिया है। हालांकि, प्रतीक ने स्पष्ट किया है कि उनका निर्णय किसी से द्वेष या नाराजगी के कारण नहीं है, बल्कि अपनी माँ की यादों और विरासत को सम्मान देने के लिए है ।

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