नई दिल्ली। अमेरिका से व्यापारिक संबंधों में संभावित दरार के मद्देनजर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सोमवार को अचानक अमेरिका रवाना हो गए। यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके लिए उन्होंने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए। वे संभवतया 8 मार्च तक अमेरिका में रहेंगे तथा अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक तथा व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रेयर से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात के बाद दोनों देशों के बड़े नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात है।
राष्ट्रपति बनने के तत्काल बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि वे दूसरे देशों पर उतना ही टैरिफ लगाएंगे जितना वे देश अमेरिकी सामान पर लगाएंगे। इसे ही रेसिप्रोकल टैरिफ कहा गया है। चीन, कनाडा और मेक्सिको पर अमेरिका टैरिफ लगा चुका है। फिलहाल भारत इससे बचा हुआ है। अनुमान कि दो अप्रैल से भारत पर भी टैरिफ लागू करने की योजना है। ये टैरिफ भारत के ऑटो, कृषि और दूसरे क्षेत्रों को प्रभावित कर सकते हैं.
पीयूष गोयल के इस अमेरिकी दौरे के बारे में सरकारी तौर पर कोई विवरण नहीं दिया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि बातचीत के दौरान वे बाहरी टैरिफ कम करने और द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता देंगे। इस यात्रा का मकसद टैरिफ विवाद को सुलझाना और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत के दौरान भी ट्रम्प ने अपने टैरिफ संबंधी फैसले को सही ठहराया था और उन्होंने कहा था कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर बहुत अधिक शुल्क लगता है और अमेरिका भी अब ऐसी ही नीति अपनाने जा रहा है। वहीं पिछले महीने पीएम मोदी के अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर भारत और अमेरिका ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का संकल्प लिया था।











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