नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी की याचिका खारिज कर दी है। याचिका में उमर ने आग्रह किया था कि उनके पिता की जान को खतरा है इसलिए उन्हें राज्य के बाहर की जेल में स्थानांतरित किया जाए। इस बीच मु्खतार अंसारी की मौत हो गई और उमर ने पिता की मौत की परिस्थितियों की जांच की मांग की।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की बैंच ने याचिका खारिज करते हुए सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाए। इसे उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को सुप्रीम कोर्ट में मिली बड़ी जीत माना जा रहा है। 28 मार्च 2024 को मुख्तार अंसारी की मौत बांदा जेल में इलाज के दौरान हुई थी। उसके बेटे ने इस मौत को संदिग्ध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह मामला जांच या हस्तक्षेप के योग्य नहीं है।
पिछले साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने उमर अंसारी की याचिकाओं पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था सिब्बल ने यह भी कहा कि आरोप है कि मुख्तार अंसारी को जेल में ज़हर मिला खाना दिया गया था। वरिष्ठ वकील की दलीलें अदालत ने दर्ज कीं। इससे पहले उमर अंसारी ने अपने पिता को आसन्न और गंभीर खतरे की आशंका जताते हुए उन्हें बांदा जेल से उत्तर प्रदेश के बाहर किसी जेल में स्थानांतरित करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिकाकर्ता ने अतीक अहमद हत्याकांड समेत उत्तर प्रदेश में हुई कई घटनाओं का जिक्र किया था।











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