पहलगाम हमले के बाद बढ़े तनाव के बीच सैन्य शक्ति पर नज़र।
भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। भारत ने स्वदेशी मिसाइल प्रौद्योगिकी में निरंतर प्रगति की है, जबकि पाकिस्तान ने चीन और अन्य देशों की मदद से अपने मिसाइल कार्यक्रम को मज़बूती दी है। भारत की मिसाइलें तकनीक, गति, और रेंज में बढ़त रखती हैं, जबकि पाकिस्तान की मिसाइल रणनीति भारत के प्रतिरोध पर केंद्रित है।
अग्नि-V: 5,000-8,000 किमी रेंज, ICBM, परमाणु ले जाने में सक्षम
ब्रह्मोस: 290-800 किमी रेंज, सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, मैक 3 की गति
K-4: 3,500 किमी रेंज, पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल
प्रलय और निर्भय: सामरिक और क्रूज मिसाइलें, 500-1,000 किमी रेंज
हाइपरसोनिक मिसाइल (मैक 9): हालिया परीक्षण, ट्रैक करना कठिन।
स्टेप 3: पाकिस्तान की प्रमुख मिसाइलें
शाहीन-III: 2,750 किमी रेंज, परमाणु क्षमता
बाबर: 700 किमी रेंज, क्रूज मिसाइल
अब्दाली: 450 किमी रेंज, बैलिस्टिक मिसाइल
फतह-II: 400 किमी, गाइडेड मिसाइल
अबाबील (MIRV क्षमता): 2,200 किमी रेंज, कई वारहेड ले जाने में सक्षम
स्टेप 4: मिसाइल रेंज व तकनीकी तुलनात्मकता।
स्टेप 5: एयर डिफेंस सिस्टम
भारत: BMD सिस्टम और रूस से आयातित S-400 डिफेंस शील्ड
पाकिस्तान: HQ-9 और LY-80 प्रणाली, परंतु भारत की तुलना में सीमित क्षमता
स्टेप 6: परमाणु आयुध क्षमता
भारत: अनुमानित 172 परमाणु हथियार, ‘No First Use’ नीति
पाकिस्तान: अनुमानित 170 हथियार, ‘First Use’ विकल्प के साथ रणनीतिक दृष्टिकोण
दोनों के पास मिसाइलों के ज़रिए परमाणु हथियारों के लॉन्च की क्षमता है।
स्टेप 7: हालिया गतिविधियां
पाकिस्तान: 3 और 5 मई को अब्दाली और फतह-II का परीक्षण
भारत: ब्रह्मोस-NG की तैनाती और हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण
ऑपरेशन सिंदूर: भारत द्वारा 6-7 मई को पीओके में सर्जिकल मिसाइल स्ट्राइक
भारत की मिसाइल प्रणाली रेंज, गति, और प्लेटफॉर्म विविधता में पाकिस्तान से आगे है। पाकिस्तान का फोकस भारत के विरुद्ध संतुलन पर है, जबकि भारत की रणनीति बहुआयामी और वैश्विक क्षमता पर आधारित है। भारत का एयर डिफेंस और हाइपरसोनिक तकनीक उसे रक्षा और आक्रमण दोनों मोर्चों पर रणनीतिक बढ़त दिलाती है











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