भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 की पहली छमाही में 7.24 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने की योजना बनाई थी, जो उस वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित कुल 12.05 लाख करोड़ रुपये के सकल ऋण का लगभग 60.06% था।
इसके अतिरिक्त, मार्च 2024 के अंत तक, भारत का विदेशी कर्ज 39.7 अरब डॉलर बढ़कर 663.8 अरब डॉलर हो गया, जो देश के विदेशी मुद्रा भंडार से अधिक है।
सितंबर 2020 तक, भारत का कुल सार्वजनिक कर्ज 1,07,04,293.66 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जिसमें आंतरिक कर्ज 97.46 लाख करोड़ रुपये और बाहरी कर्ज 6.30 लाख करोड़ रुपये शामिल थे।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि भारत पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जो देश की आर्थिक स्थिरता के लिए चिंता का विषय है।











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