होली का त्योहार भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, जिसमें होलीका दहन का विशेष महत्व है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। आइए जानते हैं 13 मार्च 2025 को होने वाले होलीका दहन का शुभ मुहूर्त और इसके पीछे की पौराणिक कथा।
शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, होलिका दहन 13 मार्च की रात को करीब 11.26 बजे से किया जा सकेगा. पूर्णिमा तिथि 13 मार्च यानी आज सुबह 10.36 से लेकर 14 मार्च को दोपहर 12.23 तक रहेगी.
होलीका दहन का महत्व
होलीका दहन की परंपरा प्रह्लाद और होलीका की पौराणिक कथा से जुड़ी है। कथा के अनुसार, असुरराज हिरण्यकशिपु ने कठोर तपस्या से ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया, जिससे उसे विशेष शक्तियाँ मिलीं। उसने स्वयं को भगवान मान लिया और सभी को अपनी पूजा करने का आदेश दिया। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और उसने पिता की आज्ञा का पालन नहीं किया। इससे क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए। अंततः उसने अपनी बहन होलीका की सहायता ली, जिसे आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। होलीका ने प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का प्रयास किया, लेकिन वरदान का दुरुपयोग करने के कारण वह स्वयं जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित बच गए。
इस घटना की स्मृति में होलीका दहन किया जाता है, जो यह संदेश देता है कि सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलने वालों की विजय होती है, जबकि अहंकार और अधर्म का नाश होता है।
समारोह की परंपराएँ
होलीका दहन के दिन लोग शाम के समय एकत्रित होकर लकड़ियों और उपलों से होलीका की स्थापना करते हैं। फिर शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित की जाती है। लोग परिक्रमा करते हैं, गीत गाते हैं और नृत्य करते हैं। यह आयोजन समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देता है।
अगले दिन रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है, जिसमें लोग एक-दूसरे पर रंग और गुलाल लगाकर खुशियाँ बाँटते हैं। यह पर्व हमें प्रेम, सद्भावना और समरसता का संदेश देता है।
इस प्रकार, होलीका दहन और होली का त्योहार भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है, जो हमें जीवन में सत्य, प्रेम और सद्भावना के महत्व को समझाता है।











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