भोपाल, मध्य प्रदेश – ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. बी.आर. आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने की मांग को लेकर कांग्रेस पार्टी ने तीन दिवसीय जन जागरण अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। यह अभियान भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. बी.आर. आंबेडकर के योगदान को रेखांकित करने और प्रतिमा स्थापना में कथित बाधाओं को उजागर करने पर केंद्रित होगा।
अभियान की रूपरेखा:
कांग्रेस पार्टी ने इस जन जागरण अभियान के लिए विस्तृत योजना तैयार की है। यह तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें विभिन्न गतिविधियाँ शामिल होंगी:
- 23 जून: इस दिन कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को डॉ. बी.आर. आंबेडकर के संवैधानिक योगदान और ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित करने की आवश्यकता के बारे में जागरूक करेंगे।
- 24 जून: गरीब बस्तियों और वंचित समुदायों के बीच सामुदायिक भोज का आयोजन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना और आंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुँचाना है।
- 25 जून: ग्वालियर में एक बड़ा भूख हड़ताल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस भूख हड़ताल के माध्यम से कांग्रेस पार्टी सरकार और न्यायपालिका पर आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने के लिए दबाव बनाने की कोशिश करेगी।
विवाद और कांग्रेस का रुख:
कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. बी.आर. आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने से इनकार करना सीधे तौर पर संविधान निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को नकारना है। वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर आंबेडकर प्रतिमा का विरोध करने और देश के इतिहास को बदलने की कोशिश करने का आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि यह केवल एक प्रतिमा का मामला नहीं है, बल्कि यह सिद्धांतों और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करने का प्रश्न है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर अपनी दृढ़ता व्यक्त की है। उनका कहना है कि डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने भारत को एक मजबूत संविधान दिया है, जो सभी नागरिकों को समानता और न्याय का अधिकार देता है। ऐसे में उनकी प्रतिमा को न्याय के मंदिर, यानी हाईकोर्ट परिसर में स्थापित न होने देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप:
इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता दावा कर रहे हैं कि BJP और RSS की विचारधारा आंबेडकर के सिद्धांतों के विपरीत है, और यही कारण है कि वे उनकी प्रतिमा स्थापना का विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर, BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वे हमेशा आंबेडकर के सम्मान में रहे हैं और उनके आदर्शों का पालन करते हैं।
इस अभियान के माध्यम से कांग्रेस मध्य प्रदेश में दलित और वंचित समुदायों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने का भी प्रयास कर रही है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अभियान कितना सफल होता है और क्या यह ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. बी.आर. आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने की दिशा में कोई ठोस परिणाम ला पाता है।
यह आंदोलन न्याय और समानता के प्रतीक डॉ. बी.आर. आंबेडकर के सम्मान को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस का केंद्र बन गया है, जिसका असर राज्य की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने पर भी पड़ सकता है। Sources











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