नई दिल्ली: गृह मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड महानिदेशालय ने सभी मीडिया चैनलों को एक परामर्श जारी किया है। इसमें उनसे अनुरोध किया गया है कि वे अपने कार्यक्रमों में नागरिक सुरक्षा के हवाई हमले के सायरन की आवाज़ों का उपयोग केवल जागरूकता अभियानों के दौरान समुदाय को शिक्षित करने के उद्देश्य से ही करें। इसका कारण यह है कि सायरन के नियमित उपयोग से नागरिकों की हवाई हमले के सायरन के प्रति संवेदनशीलता कम हो सकती है और वास्तविक हवाई हमलों के दौरान नागरिक इसे मीडिया चैनलों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक सामान्य बात समझ सकते हैं।
१० मई, २०२५ को श्री राज कुमार, एडीजी मीडिया और संचार, गृह मंत्रालय को संबोधित एक पत्र में, महानिदेशालय ने इस अनुरोध के आधार के रूप में नागरिक सुरक्षा अधिनियम, १९६८ की धारा ३ (१) (डब्ल्यू) (i) के तहत प्रदत्त शक्तियों का हवाला दिया।
परामर्श में चिंता जताई गई है कि मीडिया प्रसारणों में इन सायरन ध्वनियों का नियमित उपयोग उनके महत्व को कम कर सकता है और वास्तविक आपात स्थितियों के दौरान नागरिकों के बीच भ्रम या अनावश्यक अलार्म पैदा कर सकता है। इसमें जोर दिया गया है कि इस तरह की ध्वनियाँ, जब संदर्भ से बाहर उपयोग की जाती हैं, तो गलत व्याख्या का कारण बन सकती हैं और वास्तविक हवाई हमले की चेतावनियों के प्रति जनता की संवेदनशीलता को कम कर सकती हैं।
महानिदेशालय ने आगे कहा कि वह नागरिक सुरक्षा अधिनियम, १९६८ के संदर्भ में नागरिक सुरक्षा की तैयारियों को बढ़ाने में सभी मीडिया चैनलों के सहयोगात्मक रवैये की अपेक्षा करता है।











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