
यूनियन गवर्नमेंट द्वारा लाय गए इलेक्ट्रॉन बॉन्ड स्कीम को सुप्रीम कोर्ट ने किया असंवैधानिक*
हाल ही में यूनियन गवर्नमेंट के द्वारा बनाए गए इलेक्ट्रॉन बॉन्ड स्कीम को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ में संवैधानिक करार किया है
इनकम टैक्स एक्ट 1961 मैं एक बदलाव किए गए हैं , जिसके तहत जिस ऑर्गेनाइजेशन या परसन इलेक्ट्रॉल बांड खरीदी है उसे कोई भी टैक्स नहीं देना होगा ,जी ने अभी सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट को असंवैधानिक कर दिया जिससे कुल मिलाकर 1300 एंटिटीज को नुकसान हो रहा है, जिन्होंने पॉलिटिक्स पार्टी को टैक्स एंड सेंसेज का फायदा उठाकर डोनेशन दिया था
फोसीस, एबेसी ग्रुप, मेगा इंजीनियर आदित्य बिरला ग्रुप जीएस सब स्टील ,टोरंटो फार्मा लुपिन इंटास भारती एलएनटी एपिक फार्मास्यूटिकल लिमिटेड न्यू इलेक्ट्रॉनिक बांड खरीदे हैं अब इन कंपनियों को नोटिस मिलने लगे हैं, इसके अलावा नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन बड़ा कैसे एजुकेशन कामन काज एंड और पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन जॉइंट एक पिटीशन कार्य करते हुए जांच की मांग रखी है
किसी सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण द्वारा मुक्त किया गया है इस पिटीशन में क्लेम किया गया है की इलेक्ट्रॉन बंद के जरिए करोड रुपए का स्कीम हुआ है
इसके अलावा कुछ अन्य कंपनी ने भी इलेक्ट्रॉन बांड खरीदे थे , इन सेल कंपनियां इलेक्ट्रॉन बांड खरीदने के लिए किया गया है
मेगा इंजीनियर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड
ईपीसी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड
फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज प्रोग्राम इंडस्ट्रीज
आईएफबी एग्रो लिमिटेड इन कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड
अरविंदो फार्मा लिमिटेड ।
वेदांता। प्राइवेट लिमिटेड
भारतीय एयर टेन लिमिटेड
सबसे बड़ी दाता कंपनियां

तमिलनाडु की बेस्ट फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज जिसने 1365 करोड रुपए इलेक्ट्रॉनिक बांड खरीदे् हैं
इनमें से 39.7 यानी 542 करोड रुपए कांग्रेस को मिले 36.8 यानी की 503 करोड रुपए डीएमके पार्टी को 1.3 154 करोड़ से कांग्रेस 7.31 करोड भारतीय जनता पार्टी को मिले हैं











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