New Delhi । Advocate Amendment Bill 2025 पर देशभर में विरोध तेज हो गया है। वकीलों का मानना है कि यह विधेयक उनकी स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है और न्यायिक व्यवस्था को सरकारी नियंत्रण में लेने की साजिश है।
Advocate Amendment Bill 2025 के अनुसार, वकीलों के हड़ताल करने पर रोक लगाई जाएगी, जिससे वे न्यायिक अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकेंगे। इसके अलावा, विदेशी लॉ फर्मों को भारत में बिना किसी पारस्परिक व्यवस्था (Reciprocal Arrangement) के प्रवेश की अनुमति देने से भारतीय वकीलों के हितों को खतरा हो सकता है। सबसे गंभीर चिंता यह है कि सरकार बार काउंसिल ऑफ इंडिया पर नियंत्रण स्थापित करने की तैयारी में है, जिससे वकीलों की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी।
वकीलों नेAdvocate Amendment Bill 2025 को “न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला” करार देते हुए 21 फरवरी को दिल्ली में विशाल विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया और विभिन्न राज्यों की बार काउंसिल भी इस मुद्दे पर लामबंद हो रही हैं।
अगरAdvocate Amendment Bill बिना संशोधन के पास होता है, तो भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गंभीर खतरा मंडराएगा। वकीलों और नागरिकों का कहना है कि यह सिर्फ कानूनी पेशे का नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक न्याय प्रणाली का सवाल है।











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