चीन से जल्द ही रिश्ते सदियों पुराने जैसे अच्छे हो जाएंगेः मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ऑनएयर हुए करीब 3 घंटे के पॉडकास्ट में अपने गांव से लेकर राष्ट्रीय स्वयं संघ तथा अमेरिका और चीन के साथ अपने संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने गांव के ऐतिहासिक महत्व तथा अपने पिता के जूतों के संबंध में भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद अब दोनों देशों के रिश्ते सामान्य हो रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये रिश्ते जल्द ही वैसे हो जाएंगे जैसे सदियों पहले थे। उन्होंने कहा कि ट्रम्प की नीति अमेरिका फर्स्ट की है और मोदी की नीति भारत फर्स्ट है।


पीएम मोदी का यह पॉडकास्ट अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रीडमैन ने लिया है. फ्रीडमैन ने प्रधानमंत्री को बताया कि वे पिछले 45 घंटे से उपवास पर हैं, तब मोदी ने उपवास के महत्व, धार्मिक महत्व और अपने अनुभव पर लंबी चर्चा की। उन्होंने बताया कि जब वे ओबामा से मिलने गए था तब उनका उपवास था। ओबामा द्वारा दिए गए डिनर की भी चर्चा की और बताया कि डिनर में उन्होंने केवल गर्म पानी लिया।


आरएसएस से रिश्तों के कारण सौभाग्यशालीः
पीएम मोदी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर विस्तार से चर्चा करते हुए उस समगठन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वे भाग्यशाली हैं कि उन्हें आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) जैसे प्रतिष्ठित संगठन से जीवन का सार और मूल्य सीखने को मिले। उन्होंने बताया कि आरएसएस में जो मूल मूल्य स्थापित किए गए हैं, उनमें से एक है, आप जो भी करें, उसे उद्देश्यपूर्ण तरीके से करें। किसी भी चीज से ज़्यादा, आरएसएस आपको एक स्पष्ट दिशा प्रदान करता है जिसे वास्तव में जीवन में उद्देश्य कहा जा सकता है। दूसरा राष्ट्र ही सब कुछ है, और लोगों की सेवा करना भगवान की सेवा करने के समान है।

मेरा गांव, मेरी जिंदगीः
फ्रीडमैन ने मोदी से पूछा कि, आप एक कम संपन्न परिवार से आते हैं, कुछ के लिए ये प्रेरणा की कहानी है। मोदी ने अपने गांव के बारे में न सिर्फ बताया बल्कि अपनी निजी जिंदगी के बारे में भी खुलकर बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “हां हम एक मिट्टी के घर में रहते थे, हमारी मां और पिताजी दोनों बहुत मेहनत करते थे। हमारा गांव बहुत ऐहतिहासिक है और उनकी कर्मभूमि काशी भी ऐतिहासिक शहरों में से एक है।”


“मेरा जन्म गुजरात के एक छोटे से गांव वडनगर में हुआ, मैं जिस परिवेश में रहता था, मेरे स्कूल और गांव की कुछ विशेषताएं रहीं। मैं जैसे जैसे बड़ा हुआ मुझे पता चला कि मेरा गांव बहुत ऐतिहासिक है। जहां हिंदू, जैन और बौद्ध तीनों धर्म की शिक्षा के केंद्र थे। हमारे गांव में 12वीं सदी का बना हुआ मंदिर आज भी है। जब मैं मुख्यमंत्री बना तो कुछ जगह खुदाई करवाई, जिसमें 2000 साल पुराने सबूत मिले, जिसके बाद हमारे गांव में पुरानी चीज़ो का म्यूजियम बनवाया गया। वहीं चमत्कार भी देखों की मेरी कर्मभूमि काशी भी सबसे ऐतिहासिक है। जो सैकड़ों वर्षो पुरानी है।’

एक कमरे का घर जिसमें खिड़की तक नहीं थीः
उन्होंने बताया, ‘मैं अपने पूरे परिवार के साथ गांव में रहता था, छोटी सी जगह थी, एक कमरे के घर में रहते थे जिसमें खिड़की भी नहीं थी, एक छोटा-सा दरवाजा था, गरीबी में मेरा जीवन निकला, लेकिन हमने कभी गरीबी को बोझ नहीं बनने दिया, हमने तो जूते तक भी नहीं पहने थे, इसलिए कंपेयर या कॉम्पीटिशन जैसी होड़ नहीं थी, हमारी मां मेहनत करती थी, पिताजी डिसिप्लिन सिखाते थे पैदल काम पर जाते थे।’
ट्रम्प की तारीफ


उन्होंने चीन-भारत के रिश्तों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी दोस्ती को लेकर भी कई बातें कही हैं। उन्होंने बताया कि कैसे ट्रंप से उनकी दोस्ती गहरी हो गई। 2019 के अमेरिकी दौरे को याद करते हुए उन्होंने कहा, “हाउडी मोदी कार्यक्रम जब मैं मंच पर बोल रहा था तो ट्रंप मुझे सुन रहे थे. भाषण खत्म करके जब मैं उनके पास गया और कहा कि हम साथ में स्टेडियम का चक्कर लगाते हैं, तो वह तुरंत तैयार हो गए और मेरे साथ चल पड़े. ऐसा करना आसान नहीं था क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर कई प्रोटोकॉल होते हैं। इस समय मैंने समझा कि ट्रंप में खुद निर्णय लेने की क्षमता है. मैं भारत फर्स्ट वाला हूं वो अमेरिका फर्स्ट।

भारत-चीन के रिश्ते सदियों पुरानेः
पीएम मोदी ने कहा, “भारत और चीन का संबंध आज का नहीं है. दोनों पुरातन संस्कृति हैं। आधुनिक दुनिया में भी हम लोगों की भूमिका है। इतिहास को देखें तो भारत और चीन सदियों तक एक-दूसरे से सीखते रहे हैं। पुराने रिकॉर्ड कहते हैं कि दुनिया की जीडीपी के 50 फीसदी से ज्यादा केवल भारत और चीन का हुआ करता था।”

‘एक-दूसरे से सीखते रहते हैं भारत और चीन’

पीएम मोदी ने कहा, “पहले की सदियों में हमारे और चीन के बीच संघर्ष का कोई इतिहास नहीं मिलता है। हमेशा हम दोनों देश एक-दूसरे से सीखते रहते थे। किसी जमाने में तो चीन पर बुद्ध का प्रभाव काफी ज्यादा था। यहां से वहां ये विचार गया था। हम चाहते हैं कि भविष्य में भी हमारे संबंध ऐसे ही बने रहें। दो पड़ोसी देश होते हैं तो कुछ न कुछ अंतर होता ही है। एक परिवार में भी बहस होती है. हमारी कोशिश है कि हमारे बीच जो बहस चल रही है वो विवाद में न बदले।”
अब रिश्ते सुधर रहे हैं।


पीएम मोदी ने कहा, “चीन के साथ हमारा सीमा विवाद चलता रहता है. साल 2020 में सीमा पर जो घटनाएं घटीं, उस वजह से हमारे बीच दूरियां बढ़ गई। अभी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मेरी मुलाकात हुई. उसके बाद से सीमा पर स्थिति में सुधार हो चुका है। अब सीमा पर 2020 की अपेक्षा बहुत सुधार हुआ है. अब धीरे-धीरे वो पुराना विश्वास वापस आ जाएगा और उसमें समय लगेगा क्योंकि बीच में 5 साल का अंतराल आ गया था.”

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