चंडीगढ़। वर्ष 2008 के कुख्यात गेट पर नोट मामले में पंजाब और हरियाणा हाइकोर्ट की तत्कालीन जज (अब सेवानिवृत्त) निर्मल यादव और 4 अन्य लोगों को बरी कर दिया गया है। विशेष सीबीआई जज अलका मलिक की अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया।
इस सनसनीखेज मामले में, 13 अगस्त, 2008 को एक अन्य मौजूदा हाईकोर्ट जज निर्मलजीत कौर के आवास पर कथित तौर पर 15 लाख रुपये से भरा एक पैकेट गलत तरीके से पहुंचा दिया गया था। आरोप लगाया गया था कि यह नकदी जज यादव को एक संपत्ति सौदे को प्रभावित करने के लिए रिश्वत के रूप में दी गई थी। मामले की सूचना चंडीगढ़ पुलिस को दी गई, जिसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज की गई। हालांकि, बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।
बचाव पक्ष के वकील विशाल गर्ग नरवाना ने बताया कि मामले में कुल पांच आरोपी थे, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। नरवाना ने कहा, “आज अदालत ने मामले में फैसला सुनाया है। जस्टिस (सेवानिवृत्त) निर्मल यादव को बरी कर दिया गया है। उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए हैं।” विस्तृत आदेश का इंतजार है।
गुरुवार को अदालत ने जस्टिस यादव के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में अंतिम दलीलें सुनीं और 29 मार्च को फैसला सुनाने की तारीख तय की। इस मामले में हरियाणा के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता संजीव बंसल, दिल्ली के होटल व्यवसायी रविंदर सिंह, शहर के व्यवसायी राजीव गुप्ता और एक अन्य व्यक्ति के नाम भी सामने आए थे। आरोपियों में से एक संजीव बंसल की फरवरी, 2017 में बीमारी से मौत हो गई थी। सीबीआई ने पहले माना था कि जज यादव ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दंडनीय अपराध किया है। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 84 में से 69 गवाहों की जांच की। 17 साल के दौरान कई जजों ने इस मामले की सुनवाई की।
यह फैसला 14 मार्च को आग लगने की घटना के बाद दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के लुटियंस आवास पर नोटों से भरी चार से पांच अधजली बोरियां” मिलने पर उठे विवाद के बीच आया है। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा गठित तीन सदस्यीय आंतरिक समिति इस मामले की जांच कर रही है। जस्टिस वर्मा ने बरामद नकदी के बारे में किसी भी जानकारी से इनकार किया है।
गलत जगह पहुंच गए थे नोट
13 अगस्त, 2008 को एक हाईकोर्ट जज निर्मलजीत कौर के आवास पर कथित तौर पर 15 लाख रुपये से भरा एक पैकेट मिला था। जस्टिस कौर ने पुलिस को बुलाया और बताया कि उनके घर के सामने ये नोट मिले हैं। जांच में पता चला कि किसी ने दूसरी जज निर्मल यादव के लिए वह रकम भिजवाई थी, लेकिन रखने वाला गलती से वे नोट जज निर्मलजीत कौर के घर के बाहर रख गया।











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