144 साल बाद आए महाकुंभ में 60 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई

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महाकुंभ में 60 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई


303 जिलों से आए करीब 50,000 श्रद्धालुओं से बातचीत के आधार पर सर्वे – राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट


उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दावा किया कि प्रयागराज में इस बार का महाकुंभ 144 साल बाद आया है। सरकार ने करोड़ों रुपए के विज्ञापन देकर देशभर के सनातनधर्मियों से अपील की थी कि वे इस महाकुंभ में संगम पर स्नान कर पुण्य अवश्य कमाएं। खबरों से पता चला कि वहां अव्यवस्थाओं के कारण भगदड़ मची तथा इसी के कारण नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी भगदड़ मची। इनमें कई श्रद्धालुओं को जान गवांनी पड़ी। महाकुंभ तक पहुंचने के लिए आम श्रद्धालुओं को 10 से 15 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से प्रयागरात के बीच करीब 300 किलोमीटर तक का ट्रैफिक जाम हुआ। बाद में सरकार को घोषणा करनी पड़ी कि अब प्रयागराज आना बंद करें श्रद्धालु।
महाकुंभ में आए श्र्द्धालुओं से हुई बातचीत के आधार पर कुछ नतीजे निकल कर सामने आए। आने-जाने और रुकने पर 50 से 500% तक अधिक खर्च करना पड़ा।

हवाई टिकट 300 % तक महंगे करीब 15,220 श्रद्धालुओं से बातचीत पर आधारित

38% ने कहा- 50 से 100% तक महंगे खरीदे टिकट
25% बोले – टिकट के लिए 100% से ज्यादा देना पड़ा
13 % ने कहा.. नियमित किराये पर ही टिकट खरीदा
12 % बोले – 100 से 200% तक ज्यादा देकर टिकट खरीदा
12% ने कहा – 200 से 300% तक अधिक किराया देना पड़ा

चेन्नई से प्रयागराज का हवाई किराया 53,000 तक, नई दिल्ली से प्रयागराज का किराया 40,000 रु. तथा कोलकाता से प्रयागराज का किराय 35,000 रुपए तक पहुंच गया।
बाद में केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय के हस्तक्षेप से कुछ समय के लिए किराये में कमी हुई।

ठहरने के लिए 200 % तक ज्यादा देना पड़ा, करीब 16,550 श्रद्धालुओं से बातचीत पर आधारित

39% ने कहा- रुकने का इंतजाम करने के लिए 200% से भी ज्यादा देना पड़ा
26% ने कहा- प्रयागराज में उचित दर पर ही ठहरने की जगह मिल गई
18% बोले – कुछ समय रुकने के लिए भी 300% से द्यादा रकम देनी पड़ी
14% बोले – होटल-लॉज के लिए 50 से अधिक कीमत चुकानी पड़ी
14% ने कहा – होटल ने 50 से 100% तक ज्यादा कीमत ले ली
7% बोले – ठहरने के लिए 100 से 200 तक ज्यादा देना पड़ा।

प्रयागराज में होटलों में रूम का किराया सामान्यतया 2500 से 3000 रु. तक है, लेकिन महाकुंभ के समय यह 7-8 हजार रु. तक पहुंच गया।
मौनी अमावस्या, माघी पूर्णिमा, वसंत पंचमी पर यह 25 हजार रु. तक पहुंच गया। प्राइवेट टेंट में एक रात का किराया 45 हजार रु. से 1.5 लाख रु. तक वसूला गया।

नाव वालों ने 3 गुना ज्यादा वसूला करीब 15,520 श्रद्धालुओं से बातचीत पर आधारित

38% बोले – नाव वालों और रिक्शा वालों ने 100% तक ज्यादा वसूले
25% ने रहा – नाव वालों को 300% तक ज्यादा राशि देनी पड़ी
13% ने कहा- कहीं भी आने-जाने के लिए ज्यादा राशि नहीं देनी पड़ी
12% बोले – रिक्शा- ऑटो वालों ने 200 से 300% ज्यादा वसूला
12% ने कहा – शहर में आने-जाने के लिए 100 से 200% तक ज्यादा देना पड़ा

भारी भीड़ में बाइक वालों ने 2-3 किमी के लिए 500 से 1000 रु. तक ले लिए नदी में जाने के लिए बोट वालों ने 1000 से 5000 रु. तक वसूल किए खाने पीने के लिए जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ी। पानी की 20रु वाली बोतल 50 से 100 रु. तक में मिली, एक पराठा 40 रु. की जगह 300 से 500 रु. तक में मिला।

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