भोपाल। हमारे समाज और हमारे बीच में हर व्यक्ति विवाद के समय एक मध्यस्थ बन जाता है, लेकिन मध्यस्थता से विवाद को कैसे समाप्त किया जाए उसके लिए प्रशिक्षित मध्यस्थ होना आवश्यक है और विवाद रहित समाज की परिकल्पना में ऐसे प्रशिक्षण कार्यकम आवश्यक हैं। यह कहना है मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रदीप मित्तल का। वे रविवार को यहां पलाश रेसीडेंसी में न्यायिक अधिकारियों के लिए आयोजित 5 दिवसीय मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यकम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
मित्तल ने उम्मीद जताई कि जज तथा न्यायिक अधिकारी मध्यस्थता प्रशिक्षण प्राप्त कर विवाद रहित समाज की परिकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे।इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि समाज के छोटे से छोटे एवं बड़े से बड़े विवादों को सकारात्मकता के साथ मध्यस्थता कराकर निपटाया जा सकता है उन्होंने मध्यस्थता कार्यक्रम आयोजित कराने का अवसर भोपाल जिले को प्रदान करने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण का धन्यवाद ज्ञापित किया। मध्यस्थ सीनियर मास्टर ट्रेनर श्रीमती गिरिबाला सिंह ने कहा कि मध्यस्थता ही एक ऐसा माध्यम है जिससे छोटे से छोटे विवाद को प्रारंभिक स्तर पर प्रयास कर निपटाया जा सकता है, नहीं तो ऐसे छोटे विवाद भी आगे चलकर आपराधिक प्रकरण में तब्दील हो जाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सुनीत अग्रवाल ने अतिथियों, सीनियर मास्टर ट्रेनर तथा उपस्थित जजों को कार्यकम में सम्मिलित होने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन भोपाल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से राजकुमार थावानी ने किया।











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