नई दिल्ली। मोदी सरकार में संभवतया अब अनुवादकों ( translators) की जरूरत समाप्त हो रही है। राज्यसभा में बुधवार को पंचायती राज मंत्री Rajiv Ranjan singh Lalan (राजीव रंजन सिंह ललन) ने बताया कि सरकारी विभाग अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद के लिए गूगल ट्रांसलेट का इस्तेमाल करते हैं। विपक्ष ने कहा कि इसीलिए उनके विभाग हिंदी में जो जवाब देते हैं उनमें विसंगतियां होती हैं।
यह मामला तब उजागर हुआ जब प्रश्नकाल के दौरान एक अनुपूरक प्रश्न पूछते हुए, कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि देश में दूध उत्पादन से संबंधित उनके प्रश्न के लिखित उत्तर में व्यय और उपयोग दोनों के लिए हिंदी शब्द व्यय का इस्तेमाल किया गया है। कांग्रेस सांसद ने कहा, “हिंदी जवाब में लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती। अंग्रेजी जवाब में दो लाइनें हैं, जो हिंदी जवाब में गायब हैं। मंत्री खुद हिंदी भाषी राज्य (बिहार) से आते हैं और एक शिक्षित व्यक्ति हैं। आपका मंत्रालय संसद को जवाब देने में इतनी लापरवाही बरत रहा है।”
उन्होंने कहा कि हिंदी जवाब में “गंभीर गलतियां” हैं और मंत्री को “विसंगतियों” के लिए जवाबदेही तय करनी चाहिए। बिहार की मुंगेर लोकसभा सीट से सांसद ललन सिंह ने अपने जवाब में कहा कि अनुवाद गूगल ट्रांसलेट का उपयोग करके किया गया था, जो कि प्रौद्योगिकी दिग्गज द्वारा प्रदान की जाने वाली एक निःशुल्क सेवा है। सिंह ने कहा, “चूंकि वे (अखिलेश प्रसाद सिंह) मंत्री रहे हैं, इसलिए उन्हें पता होना चाहिए। भारत सरकार के तहत अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद गूगल ट्रांसलेट द्वारा किया जाता है। वे मंत्री रहे हैं, इसलिए उन्हें पता होना चाहिए।”
इस पर विपक्ष की ओर से कुछ देर के लिए हंगामा हुआ। लेकिन मंत्री ने विपक्ष की आलोचना को और तेज कर दिया। उन्होंने कहा, “अगर मैं उन चीजों का वर्णन करना शुरू कर दूं जो आपके सत्ता में रहने के दौरान हुआ करती थीं, तो इसे खत्म होने में घंटों लग जाएंगे।”











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