तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेन्नई में परिसीमन पर संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) की पहली बैठक की मेजबानी की। इस बैठक में विभिन्न राज्यों के नेताओं ने भाग लिया, जो स्टालिन के अनुसार, संसद में निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में “राष्ट्रीय आंदोलन” की शुरुआत थी। हालाँकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बैठक की आलोचना करते हुए डीएमके पर घरेलू शासन से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
परिसीमन पर निष्पक्षता की माँग
इस विवाद की जड़ें आगामी संसदीय सीट परिसीमन प्रक्रिया में हैं, जो अगली राष्ट्रीय जनगणना के बाद होने की संभावना है। मौजूदा अनुमान बताते हैं कि तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्य, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त की है, अपने संसदीय प्रतिनिधित्व में कमी का सामना कर सकते हैं। इसके विपरीत, जनसंख्या वृद्धि की उच्च दर वाले उत्तरी राज्यों को अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं।
बैठक को संबोधित करते हुए स्टालिन ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ नहीं, बल्कि इसके अनुचित कार्यान्वयन के विरोध में है। उन्होंने कहा, “हम निष्पक्ष परिसीमन के पक्ष में हैं और किसी भी अन्यायपूर्ण कदम का विरोध करेंगे।” उन्होंने इस प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देने के लिए एक कानूनी विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा।
समिति के सात सूत्रीय प्रस्ताव
बैठक के दौरान समिति ने परिसीमन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और राज्यों के राजनीतिक दलों व हितधारकों को इसमें भाग लेने का अवसर देने पर जोर दिया। प्रस्तावों में मुख्य रूप से यह सुनिश्चित करने की माँग की गई कि परिसीमन का कोई भी निर्णय लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए लिया जाए।
केरल के मुख्यमंत्री की तीखी प्रतिक्रिया
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस प्रस्ताव को दक्षिणी राज्यों के लिए एक गंभीर खतरा बताते हुए इसे “तलवार की मार” करार दिया। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए “स्वॉर्ड ऑफ डैमोकल्स” की उपमा दी, जो यह दर्शाता है कि सत्ता हमेशा अनिश्चितताओं और खतरों से घिरी होती है।
विजयन ने भाजपा पर आरोप लगाया कि परिसीमन की यह योजना “संकीर्ण राजनीतिक हितों” से प्रेरित है और इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करना है। उन्होंने कहा, “यह निर्णय अचानक लिया गया है और इसका आधार संवैधानिक सिद्धांतों या लोकतांत्रिक जरूरतों पर नहीं टिका है।”
तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के लिए परिसीमन एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है, जिस पर राजनीतिक बहस तेज हो रही है। एमके स्टालिन और उनके सहयोगी दल इसे क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए एक संघर्ष के रूप में देख रहे हैं, जबकि भाजपा इसे सत्तारूढ़ दलों द्वारा ध्यान भटकाने की रणनीति मान रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख बहस का विषय बन सकता है।











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