वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपना चुनवी वादा पूरा करते हुए संघीय शिक्षा विभाग को समाप्त करने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। उन्होंने शिक्षामंत्री लिंडा मैकमोहन को शिक्षा विभाग का कामकाज समेटने के निर्देश दिए। दिव्यांग बच्चों के लिए ग्रांट और फंडिंग जैसे जरूरी प्रोग्राम जारी रहेंगे। ये प्रोग्राम अन्य एजेंसियों को सौंपे जाएंगे।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने घोषणा की कि वे उनका प्रशासन शिक्षा को राज्यों में वापस लौटा रहा है। इस कदम को उठाने में 45 साल का समय लगा। पिछले महीने उन्होंने कहा था कि शिक्षा विभाग एक बहुत बड़ा धोखा है और वे इसे जल्द से जल्द खत्म करना चाहते हैं। लेकिन अब इस विभाग को पूरी तरह संघीय प्रशासन से समाप्त कर पूरी तरह राज्यों को सौंपने से पहले सीनेट की मंजूरी लेनी पड़ेगी।
अमेरिकी कानून के अनुसार, 1979 में बनाए गए शिक्षा विभाग को कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की मंजूरी के बिना बंद नहीं किया जा सकता है। और सीनेट में ट्रंप के पास मंजूरी लायक वोट नहीं हैं। लेकिन ट्रम्प ने शिक्षा प्रशासन का विकेंद्रीकरण करने का वादा किया था मतलब संघीय शासन से नियंत्रण हटा कर राज्यों को सौंपने का वादा किया था।
संघ पर आर्थिक भार कम होगाः ट्रम्प के इस कदम से संघ सरकार पर शिक्षा के क्षेत्र का भार कम होगा। पिछले 45 साल में अमेरिकी सरकार ने करीब 3 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर चुकी है। प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों के लिए केवल 13 प्रतिशत फंड केंद्र के खजाने से आता है। बाकी राज्यों और स्थानीय समुदायों द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। लेकिन कम आय वाले स्कूलों और विशेष जरूरतों वाले स्टूडेंट्स इसी से वे चलते हैं। ट्रम्प ने कहा कि शिक्षा विभाग कोई बैंक नहीं है।
पढ़ाई का गिरता स्तर
वैसे, व्हाइट हाउस की एक रिपोर्ट के अनुसार 8वीं क्लास के 70% स्टूडेंट ठीक से पढ़ नहीं पाते। 13 साल के बच्चों की मैथ और रीडिंग का स्कोर सबसे निचले स्तर पर है। चौथी क्लास के 10 में से 6 और आठवीं कक्षा के करीब तीन-चौथाई स्टूडेंट ठीक तरह से मैथ्स नहीं कर पाते। चौथी और आठवीं क्लास के 10 में से 7 स्टूडेंट ठीक से पढ़ नहीं पाते, जबकि चौथी क्लास के 40% स्टूडेंट बेसिक रीडिंग का स्तर भी पूरा नहीं कर पाते हैं।











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