मध्यप्रदेश की बेटी अंजना यादव ने हिमालय की बर्फ से ढकी ऊँची चोटियों पर जब तिरंगा हवा में लहराया, तब ऐसा लगा मानो पूरा भारत अपने वीर शहीदों को सलाम कर रहा हो।

6119 मीटर की ऊँचाई पर खड़ी अंजना यादव की आँखों में आँसू थे, लेकिन उन आँसुओं में दर्द से ज्यादा गर्व दिखाई दे रहा था। हाथों में तिरंगा और “ऑपरेशन सिंदूर” का बैनर थामे अंजना ने उन परिवारों की पीड़ा को महसूस किया, जिनके अपने पहलगाम आतंकी हमले में हमेशा के लिए उनसे दूर हो गए।
“ऑपरेशन सिंदूर” की पहली वर्षगांठ पर हिमालय की गोद से दिया गया यह संदेश केवल श्रद्धांजलि नहीं था, बल्कि उन शहीदों के प्रति पूरे राष्ट्र की भावनाओं का प्रतीक बन गया।
बर्फीली हवाओं के बीच जब अंजना यादव ने तिरंगा फहराया, तो हर लहर के साथ मानो शहीदों की वीरता, भारतीय सेना का साहस और देशवासियों का सम्मान आसमान तक पहुँच रहा था।
अंजना यादव ने भावुक होकर कहा—
“यह सिर्फ एक बैनर नहीं, उन माताओं के आँसू हैं जिन्होंने बेटे खोए, उन बहनों का दर्द है जिन्होंने भाई खोए, और उन महिलाओं की टूटी हुई दुनिया है जिनका सिंदूर उजड़ गया। मैं हिमालय की इस ऊँचाई से उन सभी वीर आत्माओं को नमन करती हूँ।”
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। निर्दोष नागरिकों की चीखें, उजड़े परिवारों का दर्द और मातृभूमि के लिए उठी आक्रोश की लहर आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। उसी दर्द का जवाब था “ऑपरेशन सिंदूर” — एक ऐसा अभियान जिसने आतंकवाद को यह संदेश दिया कि भारत अपने नागरिकों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।
एवरेस्ट बेस कैंप से आगे बढ़ते हुए अंजना यादव का हर कदम देशभक्ति का प्रतीक बन गया। उन्होंने कहा—
“जब मैंने हिमालय की ऊँचाइयों पर तिरंगा लहराया, तब मुझे लगा जैसे शहीदों की आत्माएँ हमें आशीर्वाद दे रही हों। जय हिंद सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि हर भारतीय की आत्मा है।”
हिमालय की वादियों में गूँजता “जय हिंद” और हवा में लहराता तिरंगा एक बार फिर देश को यह याद दिला गया कि भारत अपने वीरों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता।
उस दिन केवल तिरंगा नहीं लहराया था…
बल्कि पूरे राष्ट्र का गर्व, सम्मान और शहीदों के लिए श्रद्धा आसमान छू रही थी।










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